शहर कोतवाली क्षेत्र के गोड़ा देहाती गांव की वारदात ने झकझोर कर रख दिया। भूमि की भूख में सगे भतीजे के खून से चाचा और उसके पुत्रों ने हाथ लाल कर लिया। लंबे समय से चला आ रहा विवाद खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया।
मृतक जितेंद्र के दादा ने गोड़ा देहाती और गोड़ा शहरी की करीब सात मंडा जमीन बेचकर तीनों पुत्रों में बांटा था। बेटे और पोतों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए नंदगंज में तीन बीघा भूमि भी खरीदी थी लेकिन उन्हें क्या पता था कि बूढ़ी आंखों के सामने ही ऐसी घटना भी देखनी पड़ेगी।
आंखों से गिर रहे आंसू को पोछते हुए कतवारू बिंद ने बताया कि उनके तीन पुत्र दीना, लालचंद और शिव बिंद हैं। काफी समय पहले शिव बिंद का निधन हो गया था। भतीजे का हत्यारा लालचंद बिंद गोड़ा देहाती में परिवार के साथ रहता है, जबकि दीना बिंद और शिव बिंद की पत्नी शिवलोचनी गोड़ा शहरी में बने मकान में एक साथ रहती हैं।
कतवारू बिंद ने बताया कि गोड़ा देहाती और गोड़ा शहरी की लंबे समय पहले करीब सात मंडा भूमि बेचकर आरोपी लालचंद को एक बार नौ लाख और दूसरी बार दो लाख रुपये दिए थे। जबकि दीना बिंद के लड़के और लड़कियों की शादी की थी। वहीं नंदगंज के कुसमी कला गांव में तीन बीघा जमीन खरीदी थी, जिससे सभी का भविष्य सुरक्षित रह सके। इसके बाद वह चुप हो गए और बिलखने लगे।
प्रतिदिन खाना लेकर जाती थी सुगनी देवी : मृतक के बाबा कतवारू बिंद लालचंद के घर गोड़ा देहाती में ही रहते थे। प्रतिदिन मां सुगनी देवी ससुर को खाना खिलाने गोड़ा शहरी स्थित अपने आवास से करीब 400 मीटर दूर जाती थी। घटना के दिन भी सुगनी देवी लालचंद के घर रह रहे ससुर कतवारू को खाना खिलाने गई थीं।