गाजीपुर। जुलाई 2025 में हुए कानून में हुए बदलाव का असर जिला जेल पर भी पड़ा है। कानून बदलने के बाद जेल में बंदिया की संख्या 40 फीसदी तक घट गई है। जुलाई से पहले जेल में 1000 से ज्यादा बंदी थे। इस समय यह संख्या घट कर 611 हो गई है। इनमें 484 विचाराधीन बंदी है, जबकि 127 सजायाफ्ता कैदी हैं। इनमें करीब 45 प्रतिशत बंदी डीपी और पॉक्सो एक्ट के हैं। यहीं नहीं 32 महिला बंदियों में 50 फीसदी से ज्यादा दहेज उत्पीड़न के मामलों में जेल बंद हैं।
जेलर शेषनाथ यादव ने बताया कि जेल में बंदियों की संख्या में कमी का मुख्य कारण नए कानून भारतीय न्याय संहिता का लागू होना है, जिसके चलते छोटे-छोटे अपराधों में आरोपियों को अदालत से जमानत मिल जाती है। उन्होंने बताया कि जिला जेल में इस समय 127 सजायाफ्ता कैदी हैं।
वहीं, 484 विचाराधीन बंदी हैं, जिनमें 151 पॉक्सो एक्ट और 94 दहेज उत्पीड़न के मामलों में बंद हैं। इसके अलावा 32 महिलाएं भी बंदियों में शामिल हैं, जिसमें 17 दहेज उत्पीड़न में जेल में बंद हैं। इसके अलावा 239 बंदी गो तस्करी और हत्या समेत अन्य गंभीर अपराधों में आरोपी हैं।
जेलर ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता में सात साल से कम सजा वाले मामलों में सीधे जेल भेजने की प्रवृत्ति कम हुई है। इसके कारण जेल में दबाव घटा है और व्यवस्थाएं बेहतर होने लगी हैं।
000
इन धाराओं में 7 साल से कम सजा का प्रावधान
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं में सजा और जुर्माने के प्रावधानों में बदलाव किया गया है। एसपी सिटी डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि कुछ मामलों में जहां कारावास की अवधि कम रखी गई है, वहीं जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है। बीएनएस की धारा 115 (2), धारा 115 (3), स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना, शांतिभंग करने के इरादे से उकसाना और आपराधिक धमकी देने के मामलों में कम सजा का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि इन प्रावधानों का उद्देश्य छोटे और गंभीर अपराधों के बीच स्पष्ट अंतर करना है, ताकि कानून का प्रभावी और संतुलित क्रियान्वयन हो सके।
कोट-
कानून में बदलाव के चलते जेल में बंदियों की संख्या घट गई है। पहले करीब एक हजार बंदी थे, जिनकी संख्या घटकर 611 हो गई है। - शेषनाथ यादव, जेलर, जिला कारागार गाजीपुर
000
जिला कारागार की वर्तमान स्थिति
सजायाफ्ता कैदी:127
विचाराधीन बंदी: 484
पुरुष बंदी: 579
महिला बंदी: 32
पॉक्सो से जुड़े बंदी: 151
डीपी एक्ट से जुड़े बंदी: 94
000
तीन वॉच टावरों से और मजबूत होगी सुरक्षा व्यवस्था
जेल परिसर में हाई सिक्योरिटी बैरकों का हो रहा निर्माण, रखे जाएंगे दुर्दांत अपराध
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जिला कारागार की सुरक्षा व्यवस्था आधुनिक और सुदृढ़ बनाई जा रही है। इसके लिए कारागार परिसर में तीन वॉच टावरों का निर्माण किया जा रहा है, जिनके जरिये 24 घंटे निगरानी हो सकेगी। वहीं, हाई सिक्योरिटी बैरकों का निर्माण कराया जा रहा है।
जेलर शेषनाथ यादव ने बताया कि निर्माणाधीन वॉच टावरों से न सिर्फ कारागार के अंदर, बल्कि पूरे परिसर और बाहरी गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। प्रत्येक टावर करीब 30 फीट ऊंचा होगा और उस पर पुलिस कर्मियों की तैनाती के साथ हाई-पावर सर्च लाइटें लगाई जाएंगी, जिससे रात में भी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी।
जेलर ने बताया कि दुर्दांत और कुख्यात अपराधियों के लिए हाई सिक्योरिटी बैरकों का निर्माण भी तेज़ी से चल रहा है। बैरक कंक्रीट की मजबूत दीवारों से बन रहे हैं। एक बैरक का क्षेत्रफल करीब 80 स्क्वायर फीट होगा। साथ ही दो से तीन लेयर की सुरक्षा दीवारों के बीच होगी। इन बैरकों में अन्य जनपदों से लाए गए कुख्यात बंदियों को रखा जाएगा।
कोट-
तीन वॉच टावरों और हाईसिक्योरिटी बैरकों से जिला कारागार की निगरानी और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी। कानून में बदलाव का असर बंदियों की संख्या पर साफ दिख रहा है। - शेषनाथ यादव, जेलर, जिला कारागार गाजीपुर