शहर के विशेश्वरगंज के पास पैसा निकालने के लिए विजया बैंक के एटीएम पर लगी लाइन।
रविवार को बैंक बंद होने से एटीएम पर कतार में वृद्धि देखी गई। हालांकि शहर में नाममात्र के ही एटीएम काम कर रहे थे, जिस पर ग्राहक पैसे के लिए जद्दोजहद करते नजर आए। आगे-पीछे होने को लेकर लोगों में कहासुनी के साथ ही तीखी नोंक-झोंक भी होती रही। इस दौरान बीच में ही पैसा समाप्त होने से अधिकांश लोगों को बिना पैसे के वापस लौटना पड़ा।
पीएम मोदी द्वारा 8 नवंबर की रात आठ बजे 500 और 1000 के नोट को प्रतिबंधित करने की घोषणा के बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई थी। इस दौरान उन लोगों की बैचनी अधिक बढ़ गई, जिनके पास बड़ी संख्या में ये नोट थे। दस नवंबर से प्रतिबंधित नोट बदलने और जमा करने के लिए शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगी। लगातार करीब 17 दिनों तक बैंकों में ग्राहकों का जबरदस्त दबाव बना रहा। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश बैंकों की अभी भी यह हालत है कि या तो पैसा नहीं पहुंच रहा है या फिर बीच में ही समाप्त हो जा रहा है। एटीएम भी लगातार उपभोक्ताओं के दबाव में है।
रविवार को बैंक बंद होने से काम करने वाले एटीएम पर ग्राहकों की काफी लंबी लाइन लगी रही। सुबह सवा 11 बजे शहर के मिश्रबाजार स्थित स्टेट बैंक का हाल यह था कि करीब दो सौ मीटर तक ग्राहकों की लाइन लगी था। लाइन में खड़ा हर कोई अपना नंबर आने के लिए परेशान दिखा। कुछ इसी तरह की स्थिति दिन में एक बजे शहर के विशेश्वरगंज स्थित विजया बैंक की रही। लोग लाइन में खड़े होकर पैसे के लिए जद्दोजहद करते रहे। इस दौरान आगे-पीछे होने को लेकर लोगों में कहासुनी के साथ तीखी झड़प भी होती रही। शहर के महुआबाग स्थित यूबीआई, स्टेट बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक, बैंक आफ बड़ौदा सहित अधिकांश बैंकों के एटीएम के शटर गिरे रहे। इसकी वजह से काम करने वाले जिन एटीएम पर ग्राहकों की लंबी लाइन लगी थी, उनमें भी सभी लोगों को पैसा नहीं मिला। बीच में ही पैसा समाप्त होने की वजह से अधिकांश लोगों को बिन पैसे के बीच निराश होकर लौटना पड़ा।