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अपनी ठंडी छाया में न जाने कितनों का घर बसाया

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पेड़-पौधे पर्यावरण को तो शुद्ध और हरा-भरा रखते ही हैं लोगों को छाया और शीतलता भी प्रदान करते हैं। शहर सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे पेड़ हैं जो शीतल हवा के साथ ही घनी छाया दे रहे हैं। इनके नीचे बैठकर कोई सुकून और राहत पा रहा है तो कई लोग ठेला-खोमचा आदि लगाकर अपनी जीविका चला रहे हैं।
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शहर के गोराबाजार स्थित जिला अस्पताल परिसर में लगे विशाल वटवृक्ष की शरण में कई स्थाई एवं अस्थाई दुकानदार बीते कई वर्षों से रोजी-रोजगार कर रहे हैं। इन छोटे-बड़े दुकानदारों ने इसे अपना आश्रय बना लिया। सुबह आठ बजते ही ठेले-खोमचे वाले पेड़ के नीचे अपनी दुकानदारी लेकर डट जाते हैं। इसके अलावा दवा एवं जलपान की दुकान पर भी रोजाना दर्जनों की संख्या में लोग आते हैं। चाट, फल, बाटी-चोखा आदि के दुकानदार भी बरगद की घनी छाया के नीचे दुकान चलाकर अपना और परिजनों का पेट बीते कई वर्षों से पाल रहे हैं। इसी तरह विकास भवन चौराहा के पास बरगद के पेड़ के नीचे कई लोग दुकानदारी चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। इन दुकानों पर आने वाले लोग जलपान कर भूख-प्यास से राहत ही नहीं पाते बल्कि उसकी घनी छांव के नीचे फुर्सत के क्षणों में कुछ देर बैठकर थकान एवं तनाव से राहत पाकर अपने को तरोताजा महसूस कर रहे हैं।
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