बकरीद आज, बाजारों में हुई खरीदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बहरियाबाद। इस्लामिक कैलेंडर के जिल्हिजा माह के दस तारीख को मनाए जाने वाले ईदुल-अजहा के पर्व को देखते हुए, एक दिन पूर्व शनिवार को भी मुस्लिम बहुल बाजारों में जमकर खरीदारी हुई। घरों व मस्जिदों की साफ-सफाई की गई। अधिकांश लोगों ने कुर्बानी का जानवर पहले ही ले रखा है। बचे-खुचे लोगों ने आज खरीदारी की।
मालूम हो कि मुस्लिम समुदाय के लोग रब की रजाश् के लिए इब्राहिमी सुन्नत ईदुल-अजहा का पर्व जायज जानवरों की कुर्बानी कर मनाते हैं। कुर्बानी का यह पर्व तीन दिनों तक लगातार चलता है। पहले दिन सूर्योदय के बाद दो रकात नमाज के साथ पर्व की शुरुआत होती है, तत्पश्चात कुर्बानी का सिलसिला प्रारंभ होता है। लोग एक-दूसरे को गले लगा कर मुबारकबाद देते हैं। भारतीय जनता पार्टी के सादात उत्तरी के मंडल महामंत्री दानिशवरा ने लोगो से अपील की है कि ऐसे ही जानवरों की कुर्बानी करें की जिसकी हमें कानून में इजाजत है, प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न करें। कुर्बानी के दिनों में साफ सफाई का पूरा ख्याल रखें क्योंकि इस्लाम में साफ सफाई को आधा ईमान करार दिया गया है। कुर्बानी देते वक्त दूसरे मजहब की भावनाओं का खास ख्याल रखते हुए कुर्बानी खुले में ना करें। कुर्बानी की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर न करें।
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समय-सारणी-
बहरियाबाद
ईदगाह मस्जिद = 6:30
शाही मस्जिद = 7:00
उत्तर मुहल्ला मस्जिमस 7:00
जामा मस्जिद मलिकनगांव = 7:00
पलिवार = 7:00
शादियाबाद ईदगाह मस्जिद= 7:30
नन्दगंज जामा मस्जिद = 7:30
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इनसेट
बहरियाबाद। उल्लेखनीय है कि मुस्लिम समुदाय के लोग इब्राहिमी सुन्नत ईदुल-अजहा का पर्व जायज जानवरों की कुर्बानी कर मनाते हैं। जामा मस्जिद के इमाम हाफिज अब्दुल खालिक ने बताया कि बड़े जानवर सात लोगों के नाम से होते हैं। जबकि छोटे जानवर बकरा, बकरी, भेड़ आदि एक व्यक्ति के नाम से होती है। इसी के साथ शर्त यह भी है कि जानवर मोटा तगड़ा और स्वस्थ हो। उस जानवर में किसी प्रकार का ऐब न हो। यहां तक कि न उसके कान कटे हों न आंख में ऐब हो। जानवर स्वयं घर पाल कर उसकी कुर्बानी दी जाए तो और बेहतर है। कुर्बानी तीन दिनों तक लगातार होती है जो पहले दिन ईद की नमाज के बाद प्रारंभ होती है।