जनाधिकार मंच के संस्थापक पूर्व काबिना मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने केेंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार भले ही विकास के बड़े-बड़े दावे करे लेकिन किसान परेशान है। उसका जीवन नारकीय हो गया है लेकिन सरकार उनकी आवाज दबाने में लगी है। वह लंका मैदान में शुक्रवार को जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज को दबाने नहीं दिया जाएगा।
जनसम्पर्क यात्रा के तहत गाजीपुर पहुंचे कुशवाहा ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 1994 में वैश्विक बाजार खोलने का हवाला देकर विश्व व्यापार संगठन के साथ समझौता किया गया। इसके अनुसार कृषि अनुदान खत्म करने की सहमति बनी। सरकार धीरे-धीरे खाद, बिजली, पानी पर से सब्सीडी कम कर रही है। इसकी सीधी मार किसानों पर पड़ी है। खेती की लागत बढ़ती गई और लाभ कम होता गया। बुंदेलखंड के किसान तबाह हो गए।
वहां राहत पैकेज के हजारों करोड़ रुपये दिए गए लेकिन उनकी बंदरबांट हो गई।। इसका लाभ किसानों को नहीं पहुंचा। नौकरशाह, दबंग और उनके रिश्तेदार अमीर हो गए। किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। यह सि्थति अब नहीं चलने दी जाएगी। किसान अपनी सि्थति के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं तो सरकार उन्हें कुचल रही है। अब यह सि्थति नहीं चलेगी। किसानों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आजाद भारत में भी शोषित एवं वंचित समाज की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया। आज अति पिछड़ों, दलितों को राजनैतिक भागदारी से दूर ही रखा गया। उन्होंने कहा कि जनाधिकार मंच सभी जातियों को जाति के आधार पर आरक्षण एवं भागीदारी दिलाने के लिए कटिबद्घ है। जिनको आज तक सत्ता में भागीदारी नहीं मिली है हम उनको सत्ता में भागीदारी दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। समाज में जब तक हर व्यकि्त को उसका उचित स्थान और अधिकारी नहीं मिल जाता हमारा संघर्ष चलते रहेगा।
सभा में सुरेंद्र कुशवाहा, रामस्नेही, राजेंद्र पाल, आईपी कुशवाहा, हंसलाल कुशवाहा, अभिमन्यू कुशवाहा, गुलाब बिंद, अंगद, अजीत कुशवाहा, मदन सिंह कुशवाहा, रामनवल कुशवाहा, डॉ. विशाल सिंह, महेंद्र मास्टर, अजय कुशवाहा मौजूद रहे। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष नंदकुमार कुशवाहा ने की जबकि कार्यक्रम का संचालन अवधेश कुशवाहा ने किया।
देवकली संवाददाता के मुताबिक गाजीपुर की सीमा में प्रवेश करने के बाद ही उनका स्वागत शुरू हो गया। रास्ते में जगह-जगह स्वजातीय समाज के लोगों और पार्टी के नेताओं ने उनका गाजेबाजे के साथ स्वागत किया। सिधौना, शादीभादी, शेखपुर, बासुचक, देवकली, नंदगंज आदि स्थानों पर लोग उनकी प्रतीक्षा में खड़े थे। उनके काफिले को जगह-जगह रोककर लोगों ने उनको फूल मालाओं से लाद दिया।