कोरोना संक्रमण के दौरान दो वर्षों आनलाइन पढ़ाई होती रही। अब कक्षाएं चलने लगी हैं और लग रहा है। लगने लगा है आनलाइन पढ़ाई से पीछा छूट गया लेकिन ऐसा होने वाला नहीं है। डिजिटल गजेट्स की दखल से अब पढ़ाई मुक्त होने वाली नहीं है। तमाम अध्ययन सामग्री आनलाइन तरीके से ही उपलब्ध हैं।
लॉकडाउन के दौरान डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा था। सरकारी और निजी संस्थानों में वर्चुअल बैठकें होने लगीं और ऑनलाइन शिक्षा का भी तेजी से प्रसार हुआ। अब यह जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। डिजिटल तकनीक का भरपूर इस्तेमाल शैक्षणिक संस्थानों में भी किया गया। उसके सकारात्मक परिणाम भी दिखाई दिए। व्हाट्सअप ग्रुप के जरिए छात्रों का संपर्क एक-दूसरे से बढ़ा तो यू ट्यूब के जरिए बेहतर अध्ययन सामग्री प्राप्त हो रही है। आडियो-विजुअल तकनीक से विषयों को सीखने में तो आसानी हुई ही है, दूर बैठे किसी अध्यापक की कक्षा में शामिल हुआ जा सकता है।
कक्षाएं शुरू होने पर पाठ्यक्रम में 30 फीसदी की कमी कर दी गई और जनवरी तक पाठ्यक्रम तेजी से पूरा किया गया। मगर छात्र आनलाइन कक्षाओं से जुड़े रहे। दूरदर्शन चैनलों पर भी क्लास ली जाती रही। मुहल्ला क्लास और शिक्षा सारथी के जरिए भी बच्चों को सीखने का मौका मिला। अब जब कक्षाएं चलने लगीं हैं तब भी डिजिटल तकनीक की मदद से छात्र सीख पढ़ रहे हैं।
भले ही संक्रमण कम हो गया है लेकिन विद्यालयों में कोरोना गाइड लाइन का पालन कराया जाएगा। बोर्ड परीक्षाओं में सभी को कोरोना गाइड लाइन का पालन करना होगा। स्कूल के गेट पर ही छात्रों की जांच की जाएगी। और सबको मास्क लगाना अनिवार्य होगा। -
डा ओपी राय, जिला विद्यालय निरीक्षक
सभी विद्यालयों में कोरोना प्रोटोकाल के साथ ही पढ़ाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। कोरोना से बचाव के स्लोगन विद्यालयों की दीवारों पर लिखवा कर उन्हे जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा बच्चों के सीखने की धीमी पड़ी प्रक्रिया को सुधारने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।-
हेमंत राव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
कोरोना काल में आनलाइन पढ़ाई के नकारात्मक असर भी दिखे हैं। पहले जिन बच्चों को मोबाइल से दूर रहने की हिदायत दी जाती थी। उनको अभिभावकों ने मोबाइल खरीदकर दिया है। लगातार आनलाइन रहने की वजह से तमाम बच्चों को चश्मे लग गए। मोबाइल के चलते बच्चों के व्यवहार में भी परिवर्तन देखने को मिला है।
-सोमारू प्रधान, डायट प्राचार्य, सैदपुर
आनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चों को घर में ना तो सहपाठियों का साथ मिला और न ही स्कूली अनुशासन। आफलाइन कक्षाओं के शुरू होने के बाद कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षक सभी छात्रों को बेहतर करने के लिए अतिरिक्त मेहनत कर रहे हैं। -
राजेश कुमार सिंह, प्रधानाचार्य
घरों में स्कूलों की तरह अनुशासन नहीं मिल पाता है। आनलाइन क्लास के दौरान बच्चों में अनुशासन की कमी देखने को मिली। जिसका पढ़ाई पर भी असर हुआ। आनलाइन पढ़ाई से बच्चों की पढ़ने और लिखने की क्षमता पर भी विपरीत असर पड़ा है। कोरोना के कारण शिक्षा काफी पीछे चली गई है।
-ज्ञानेश पांडेय, अभिभावक
कक्षाओं में पढ़ाई के लिए एक अच्छा माहौल होता है।आनलाइन के दौरान कईं समस्याएं होती थीं। छात्रों से ज्यादा अभिभावकों को मेहनत करनी पड़ती थी। ज्यादा देर तक पढ़ना संभव नहीं होता था। लिखने का अभ्यास भी कम हो गया था। वहीं अब आफलाइन कक्षाएं शुरू होने से काफी सहूलियत हुई है।
-निमिष कुमार पांडेय, छात्र