रविवार को एक तरफ जहां पूरा जिला कड़ाके की ठंड से कांपता रहा है। वहीं सोमवार को चमकीली धूप निकलने से आम और खास के चेहरे पर मुस्कान आ गई। एक तरफ जहां धूप के बीच बड़े खिलखिलाते नजर आए। वह सड़कों और घरों के बाहर बच्चों की चंचलता दिखी।
निर्धन हो या धनवान, सभी ने अच्छी धूप का लाभ उठाया है। सूर्यांस्त होने तक लोग धूप सेकते रहे। रविवार की सुबह एक तरफ जहां घने कोहरे की बीच वाहनों की रफ्तार पूरी तरह से धीमी रही, वहीं गलन के बीच पूरा जिला जमा रहा। घरों के बाहर की कौन कहे, कमरे अंदर भी गलन लोगों का पीछा नहीं छोड़ रही थी।
गलन का प्रभाव इस कदर था कि एक थोड़ी देर तक खड़े रहने पर पूरा शरीर अकड़ने लग रहा था। राहत पाने के लिए घरों के अंदर के साथ ही बाहर आवागमन करने वाले अलाव तापते रहे।
हर कोई ठंड की दुहाई दे रहा था। रात में जिस तरह से कोहरे ने अपना प्रभाव दिखाया, उससे ऐसे प्रतीत हो रहा कि सुबह मौसम का हाल और भी खराब होगा, लेकिन दिन में 10 बजे ही सूर्यदेव ने आंखें खोल दी। अच्छी धूप निकलने से सर्दी से बेहाल लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
इसका आनंद लेने के लिए लोग अपने मकानों की छतों पर पहुंच गए। गृहणियों ने भी अपने सभी काम धूप में ही निपटाए। दिन में 11 बजे विकास भवन परिसर का नजारा यह था कि इधर-उधर समूह में बैठकर लोग धूप के आनंद लेेते रहे। कुछ इसी तरह की स्थिति जिला अस्पताल परिसर की भी रही। मरीजों के तीमारदार परिसर में धूप के बीच बैठकर ठंड से राहत पाते रहे। हालांकि शाम को पुन: ठंड का प्रभाव बढ़ गया।