सुरवत गांव स्थित संत फक्कड़ बाबा की समाधि स्थल। संवाद
कासिमाबाद। क्षेत्र के लोग फक्कड़ बाबा का नाम सम्मान से याद करते हैं। वे स्थानीय विकास खंड के उत्तरी छोर पर टौंस नदी किनारे स्थित सुरवत में कार्तिक मास के अष्टमी तिथि को वर्ष 1962 में ब्रह्मलीन हुए थे। इसी तिथि को प्रत्येक वर्ष बाबा की समाधि स्थल पर पुण्यतिथि के साथ मेले का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में 14 अक्तूबर को मेले का आयोजन किया जाएगा।
मेले में जिले के साथ मऊ और बलिया जनपद के आसपास के सभी व्यवसायी अपनी दुकानों को लगाते हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले आदि भी लगाए जाते हैं। मान्यता है कि फक्कड़ बाबा एक सिद्ध पुरुष संत थे। वह मऊद के रतनपुरा विकासखंड के बहती गांव में एक साधारण कुटी बनाकर निवास करते थे। वर्ष 1953 में सुरवत सहित आसपास के गांवों में प्लेग एवं हैजे की बीमारी ने महामारी का रूप धारण कर लिया था। लोग काफी परेशान थे। प्लेग जैसी खतरनाक बीमारी से प्रतिदिन लोगों के मरने का सिलसिला चल रहा था । इसी बीच गांव वालों ने फक्कड़ बाबा से निवेदन कर महामारी का समाधान करने का अनुरोध किया। इसके बाद फक्कड़ बाबा सुरवत गांव पहुंचकर हरि कीर्तन प्रारंभ कराने के साथ गांव में डोला घुमाकर शांति के लिए प्रार्थना किए। फक्कड़ बाबा के आने के बाद कुछ ही दिनों में प्लेग खत्म होने लगा। इसके बाद फक्कड़ बाबा सुरवत में ही रहने लगे। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद वर्ष 1963 से समाधि स्थल पर ग्रामीण उनकी पुण्यतिथि मनाने लगे। इस दौरान मेले का आयोजन होता है। मेला समिति के मंत्री रविंद्रनाथ पांडेय ने बताया कि मेले में 500 से ज्यादा दुकानें लगती हैं। मेले में महिलाओं के लिए अलग से मेला लगता है। इसमें केवल महिलाओं का ही प्रवेश रहता है। वहीं बिरहा का भी आयोजन किया जाएगा। विजय लाल यादव व ओमप्रकाश यादव के बीच बिरहा मुकाबला होगा।