गाजीपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में सब कुछ रामभरोसे चल रहा है। विभाग के बड़े से लेकर छोटे अधिकारी बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं। विद्यालय विकास अनुदान मद में भेजे गए करोड़ों रुपये मिलकर डकार लिए गए। इसका खुलासा परिषदीय स्कूलों में हुई गृह परीक्षा के दौरान हुआ है। शासन ने इस मद से परीक्षा सामग्री खरीदने का निर्देश दिया था लेकिन प्रधानाध्यापकों ने जैसे-तैसे परीक्षा संपन्न कराकर धनराशि डकार ली। अब विभागीय अधिकारियों की बोलती बंद हो गई है। हालांकि डीएम ने पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच कराने के संकेत दिए हैं।
हर वर्ष प्रत्येक परिषदीय के प्राइमरी विद्यालय में पांच हजार रुपये तथा जूनियर विद्यालयों में सात हजार रुपये विद्यालय विकास अनुदान के रूप में भेजे जाते हैं। इस मद से विद्यालय में फर्नीचर, चटाई, खेलकूद की सामग्री, चाट डस्टर एवं अन्य आवश्यक सामानों की खरीदारी करने का निर्देश हेडमास्टरों को दिया गया है। पहली बार शासन से विद्यालय विकास अनुदान मद से बच्चों को अंक पत्र, विद्यालय के छात्रों को टेबुलेशन और परीक्षाफल तैयार करने को रजिस्टर बनाने के निर्देश हैं। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि गृह परीक्षा में इस धनराशि का प्रयोग किया जाए। अभी उपजिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कृष्णानंद उपाध्याय ने कहा था कि हेडमास्टर विद्यालय विकास अनुदान से कापी खरीद सकते हैं। इसके बाद भी जिले के 1752 प्राथमिक विद्यालय में दो लाख 85 हजार छात्र तथा 725 जूनियर हाईस्कूलों में 65 हजार छात्र बिना कापी और पर्चा के परीक्षा दे रहे हैं। इसका खुलासा अमर उजाला की टीम ने किया है। कहीं भी कापी वितरित नहीं की गई है। परीक्षा के दौरान शासन के किसी भी निर्देश का पालन हेडमास्टरों ने नहीं किया था। विद्यालय विकास अनुदान मद की धनराशि बंदरबांट हो गई। बेसिक शिक्षा विभाग में दर्जनों ऐसे मद हैं जिनको कागजों में ही खर्च किया जाता है। विभागीय अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी चुप्पी साधे रहते हैं। इस मामले की जानकारी जब डीएम प्रभु एन सिंह को दी गई तो उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग पर उनकी कड़ी नजर है। जल्द ही विभाग के कुछ मदों की जांच दूसरे विभाग के अधिकारी से कराई जाएगी।