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Ghazipur News: 20 घाटों पर गंगा में रोजाना मिल रहा 37.15 एमएलडी गंदा पानी, सावन में भक्त यहीं जल लेकर करेंगे अभिषेक

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शहर के कलक्टर घाट पर गंगा में मिलता नाला। संवाद
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गाजीपुर। जनपद में 35 गंगा घाट हैं। इनमें से 20 गंगा घाटों पर प्रतिदिन 37.15 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) गंदा पानी नालों के माध्यम से गिर रहा है। वहीं चार दिनों में सावन शुरू होने जा रहा है। बीते वर्षों में आए श्रद्धालुओं के आंकड़े और जिला प्रशासन के अनुमान को देखें तो इस बार सावन में 9.70 लाख शिवभक्त गंगा में डुबकी लगाकर महादेव को जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ में गंगा जल भरेंगे। वहीं जिम्मेदारों की ओर से सावन को देखते हुए गंगा को निर्मल करने के लिए कोई पहल नहीं की गई है।
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शहर में चीतनाथ, रामघाट, अंजनी घाट, पोस्ता घाट, खिड़की घाट, बूढ़े महादेव घाट, स्टीमरघाट, गोलाघाट, रामेश्वर घाट, ददरीघाट, सिकंदरपुर, बड़ा महादेवा घाट, छोटा महादेवा घाट, पत्थर आदि गंगा घाटों पर नालों का गंदा पानी बह रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में गहमर के नरवा घाट, सैदपुर में बूढ़े महादेव आदि गंगा घाटों पर भी नालों का गंदा पानी गिर रहा है। शहर के ददरीघाट व चीतनाथ घाट पर सावन में शिवभक्तों की सर्वाधिक भीड़ उमड़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों में गहमर के नरवा व सैदपुर के रंगमहल तथा बूढ़े महादेव गंगा घाट पर भी शिवभक्तों की भीड़ उमड़ती है। इन सभी गंगा घाटों पर नालों से गंदा पानी गिरने को रोकने के लिए कोई पहल नहीं किया गया है। वैसे तो गंगा में नालों का पानी प्रतिदिन गिरता है, लेकिन सावन को लेकर भी जिला प्रशासन की ओर से गंगा को निर्मल करने का कोई प्रयास नहीं किया गया।

केस एक - शहर के ददरीघाट पर सावन में आस्था का सैलाब उमड़ता है। यहां शहर के अलावा आसपास के 29 गांवों के शिवभक्त पहुंचते हैं। ददरीघाट के बाएं हिस्से में नाले का गंदा पानी प्रतिदिन गंगा में गिरता है। स्थायी की बात छोड़िए जिम्मेदारों की ओर से अस्थायी प्रबंध भी नहीं किया गया है।
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केस दो - गहमर के नरवा गंगा घाट पर सावन में गंगा स्नान व कांवड़ में जल लेने को लेकर शिवभक्तों का हुजूम उमड़ता है। गहमर जनपद के बड़े गांवों में शामिल है। गहमर के अलावा आसपास के 21 गांवों के शिवभक्त सावन में नरवा गंगा घाट पहुंचते हैं।
सामान्य दिनों में गंगा में नालों के माध्यम से गंदा पानी प्रतिदिन गिरता है। लेकिन कम से कम सावन के पवित्र महीने को देखते हुए प्रशासन को गंगा को स्वच्छ रखने की पहल करनी चाहिए। - जयशंकर उपाध्याय, गहमर
गंगा के स्वच्छता को लेकर जिले में करोड़ों रुपये खर्च किया गया, लेकिन इसके बावजूद मोक्षदायिनी निर्मल नहीं हो पाईं। ऐसे में गंगा स्वच्छता अभियान पर सवाल खड़े हो रहे हैं। - सुनील यादव, सैदपुर
गंगा केवल नदी नहीं है। यह आस्था से जुड़ी हुई है। ऐसे में गंगा को निर्मल करने को लेकर गंभीरता से पहल करने की जरूरत है। - सतीश उपाध्याय, वैद्यटोली रायगंज

गंगा घाटों पर प्रतिदिन गिरने वाले गंदे पानी का ब्यौरा -
गंगा घाट गिरने वाला गंदा पानी
चीतनाथ 1.00 एमएलडी
रामघाट 0.50 एमएलडी
अंजनी घाट 1.25 एमएलडी
पोस्ता घाट 1.10 एमएलडी

खिड़की घाट 1.05 एमएलडी

बूढ़े महादेव घाट 1.07 एमएलडी

स्टीमरघाट 1.06 एमएलडी

गोलाघाट 1.08 एमएलडी

रामेश्वर घाट 1.11 एमएलडी

ददरीघाट 1.40 एमएलडी

सिकंदपुर 1.38 एमएलडी

बड़ा महादेव 1.28 एमएलडी

छोटा महादेव 1.30 एमएलडी

पत्थर घाट 1.20 एमएलडी

बूढ़े महादेव सैदपुर 1.35 एमएलडी

रंगमहल 1.38 एमएलडी

संगम घाट 1.33 एमएलडी

नरवा घाट 1.29 एमएलडी

मठिया घाट बारा 1.36 एमएलडी

नालों को टैपिंग करने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। शासन की ओर से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने व बजट जारी होते ही नालों की टैपिंग कराने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - डीके राय, ईओ नगर पालिका

शहर में हैं 15 नाले

शहर में प्रमुख रूप से 15 नाले हैं। इनमें चीतनाथ, रामघाट, अंजनी घाट, पोस्ता घाट, खिड़की घाट, बूढ़े महादेव घाट, स्टीमरघाट, गोलाघाट, रामेश्वर घाट, ददरीघाट, सिकंदरपुर, बड़ा महादेवा घाट, छोटा महादेवा घाट, पत्थर आदि शामिल हैं। वहीं सैदपुर में तीन नाले गंगा में गिरते हैं। इनमें बूढ़े महादेव घाट, रंगमहल, संगम घाट शामिल है। जबकि गहमर में नरवा घाट तो बारा में मठिया घाट से एक-एक नाले का पानी गंगा को प्रदूषित करने का काम कर रहा है।

गंगा में गंदा पानी गिरने का कारण

शहर की परिधि में 15 नालों का गंदा पानी विभिन्न गंगा घाटों के माध्यम से सीधे मोक्षदायिनी में गिरता है। इसकी वजह यह है कि इन नालों की टैपिंग का कार्य नहीं किया गया। अब इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। शासन से प्रस्ताव को मंजूरी व बजट जारी होने के बाद शहर में गंगा घाटों पर गिरने वाले नालों की टैपिंग का कार्य किया जाएगा।

एसटीपी के हैंडओवर होने के बाद क्रियाशील हुआ सीवर

वर्ष 2019 में शुरू हुई सीवर परियोजना के तहत शहर में 105 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाई गई और 12,650 घरों को इससे जोड़ा गया। इस पर 133 करोड़ रुपये खर्च किया गया। वहीं नमामि गंगे योजना के तहत देवकठिया-जमुनादेवा के पास 68.65 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी बनाया गया। इन दोनों परियोजनाओं पर कुल 201.65 करोड़ रुपये खर्च किए गए। एसटीपी को हैंडओवर करने के साथ ही उसको सीवर कनेक्शन से जोड़ दिया गया है। इसके बाद से सीवर प्रोजेक्ट क्रियाशील हो गया है।

125 किलोमीटर बिछेगी सीवर पाइप लाइन
सीवर प्रोजेक्ट के साथ ही एसटीपी का निर्माण होने के बाद भी शहर में नालों के माध्यम से गंगा में गंदा पानी गिर रहा है। इसकी एक वजह शहर के पूरे हिस्से में सीवर पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। वर्ष 2018 में शासन की ओर से शहर में केवल 105 किलोमीटर सीवर पाइप लाइन बिछाने के प्रस्ताव को ही मंजूरी दी गई। अब प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के तहत जलनिगम शहरी की ओर से 286 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। अगर शासन से प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो शहर के शेष 125 किलोमीटर के हिस्से में सीवर पाइप लाइन बिछाई जाएगी। साथ ही 15 हजार होम कनेक्शन किए जाएंगे।

शहर के पूरे हिस्से में सीवर पाइप लाइन नहीं बिछी है। जितनी बिछी है, उसको एसटीपी से कनेक्ट करके चालू कर दिया गया है। शहर के शेष हिस्से में सीवर पाइप लाइन बिछाने को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।-स्वतंत्र सिंह, अधिशासी अभियंता, जलनिगम शहरी

शहर के कलक्टर घाट पर गंगा में मिलता नाला। संवाद

शहर के कलक्टर घाट पर गंगा में मिलता नाला। संवाद

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