जिले में साल भर में 1238 सामुदायिक शौचालय बनने थे लेकिन सिर्फ 813 ही निर्मित हो सके हैं। शासन ने सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के लिए 86 करोड़ 66 लाख रुपये का प्रावधान किया है। पंचायत राज विभाग का कहना है कि शेष 425 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूरा कराने के लिए 30 सितंबर तक की तिथि निर्धारित की गई है।
सामुदायिक शौचालयों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें चार सीटर की लागत 5 लाख 71 हजार, छह सीटर की लागत 7 लाख 51 हजार है। वहीं, स्थिति यह है कि बहुत से ऐसे सामुदायिक शौचालय बनाने के लिए उसकी नींव तक नहीं खोदी जा सकी है। जबकि कुछ ऐसे हैं जिसका निर्माण कार्य आधा-अधूरा पड़ा है। सरकार की शीर्ष प्राथमिकता वाले स्वच्छ भारत अभियान के तहत करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बहुत सी ऐसी पंचायतें हैं जहां इसके निर्माण को लेकर जिम्मेदार कोई खास रुचि नहीं लेना चाहते हैं।
प्रत्येक ग्राम सभा में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराने की कवायद पिछले वर्ष शुरू की गई थी। प्रदेश सरकार ने सामुदायिक शौचालयों में स्वच्छता बनाए रखने और रखरखाव का दायित्व राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में गठित महिला स्वयं सहायता समूह को दिया है। इन महिला स्वयं सहायता समूह को निर्धारित धनराशि मासिक तौर पर उपलब्ध कराया जायेगा। हर गांव में एक महिला केयर टेकर की नियुक्ति भी होगी। जिसे छह हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा। इन्हीं महिला केयर टेकर के पास शौचालय की मेंटिनेंस का जिम्मा भी होगा। जिसके रखरखाव सामग्री आदि के लिए तीन हजार रुपये अतिरिक्त दिया जाएगा।
जिन ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण अभी पूरा नहीं हो पाया है। उनका निर्माण पूरा करने की तारीख 30 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। जिस गति से निर्माण कार्य जारी है उम्मीद है कि इसे निर्धारित तिथि तक हर हाल में निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।-रमेश उपाध्याय, जिला पंचायत राज अधिकारी।