यूं तो देश भर में प्रदूषण ने हालात खराब कर रखे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में जहरीली हवा कुछ ज्यादा कहर बरपा रही है।
अपने औद्योगिक विकास को लेकर इतराने वाला गाजियाबाद और ऐतिहासिक विरासत समेटने वाले इलाहाबाद में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है।
पॉल्यूशन फ्री हवा के लिहाज से उन्नाव और रायबरेली की हालत सबसे बेहतर है, लेकिन गाजियाबाद और इलाहाबाद की हवा में प्रदूषण का स्तर बेहद ज्यादा है।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट (सीएसई) ने उत्तर भारत में हवा की क्वालिटी पर जारी समीक्षा रिपोर्ट में यह खुलासा किया है।
सेंटर ने प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट के पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम व नियंत्रण) प्राधिकरण के साथ मिलकर लखनऊ में एक वर्कशॉप भी आयोजित की।
‘साफ हवा और बेहतर आवागमन’ विषय पर आयोजित इस वर्कशॉप में बताया गया कि बड़े शहरों के बाद अब मध्यम श्रेणी के शहरों में बढ़ते वाहनों की तादाद से पॉल्यूशन काफी बढ़ रहा है। सीएसई ने इसके लिए तुरंत ऐहतियाती कदम उठाने की वकालत की है।
लखनऊ में कहां है सबसे जहरीली हवा?
रिपोर्ट में राजधानी लखनऊ के चारबाग, अमौसी, विकासनगर और चौक जैसे इलाकों को प्रदूषण का गढ़ करार दिया गया है।
सेंटर के अनुसार इन इलाकों में कई किस्म के पॉल्यूटेड एलिमेंट हवा में मौजूद हैं, जो सेहत के लिए खतरनाक हैं।
देश में हर पांचवी मौत की जिम्मेदार
सेंटर ने ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि देश में हर पांचवीं मौत का जिम्मेदार वायु प्रदूषण है। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर भारत में लखनऊ और चंडीगढ़ जैसे शहरों का पर्यावरण लोगों की सेहत के लिए नए खतरे पैदा कर सकता है।
पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण के अध्यक्ष भूरे लाल ने कहा कि प्रदूषण की चपेट में आ रहे ये नए शहर, महानगरों के मुकाबले बड़ी चुनौती साबित होने वाले हैं।
सीएसई की कार्यकारी निदेशक (रिसर्च एंड एडवोकेसी) अनुमिता रायचौधरी का कहना था कि अगर जल्द से जल्द समाधान पर काम शुरू नहीं हुआ, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।
डीजल ज्यादा बड़ी आफत
• सीएसई ने डीजल की बढ़ती खपत को वायु प्रदूषण की मुख्य वजहों में बताया है। सेंटर के अनुसार इससे निकलने वाले तत्व मनुष्य के लिए कैंसर का खतरा पैदा कर सकते हैं।
• खराब यातायात व्यवस्था और बढ़ते वाहन भी प्रमुख वजहों में शामिल हैं। इसकी वजह से ट्रैफिक जाम लगता है और ईंधन की खपत बढ़ती है। इससे प्रदूषण बढ़ना तय है।
• ऑटो फ्यूल पॉलिसी 2010 के तहत देश का ज्यादातर हिस्सा अभी भारत स्टेज-3 पर है, जबकि सिर्फ 13 शहरों में ‘भारत स्टेज-4’ लागू हुआ है। इस सिलसिले में कदम उठ रहे हैं, लेकिन रफ्तार धीमी है।
• देश में डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट यानी बसों को महंगा करता है। इस पर सरकार को लचीला रवैया अपनाना होगा।