बलीपुर गांव में डीएसपी की हत्या के बाद लोगों में खाकी का समाया भय अभी दूर भी नहीं हुआ कि अब उन्हें सीबीआई का डर सताने लगा। कहीं कोई पूछ न ले और उन्हें कुछ बताना पड़ जाए। इसलिए गांव के अधिकतर लोगों ने घर छोड़ अपना ठिकाना कछार में बना रखा है। महिलाएं सुबह-शाम घर में भोजन पकाने आती हैं तथा बच्चों के हाथ लोगों तक भोजन पहुंच जाता है। इससे उनकी रोजी-रोटी किसी प्रकार चल पा रही है।
बलीपुर गांव में डीएसपी जियाउल हक की हत्या के बाद से पसरा सन्नाटा टूटने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम गांव पहुंची तो बलीपुर चौराहे पर हल्की सी चहल-पहल दिखी। पन्नी तानकर चाय की दुकान खोले बैठे वृद्ध से दुकान खोलने की बाबत पूछा गया। उन्होंने नाम तो नहीं बताया बोले भैया पीएसी वालों ने कहा कि दुकानें बंद हैं, चाय की कहीं से व्यवस्था कर दो। इस पर हम दुकान खोलकर बैठ गए।
चौराहे पर खुली नाई की दुकान पर बात करने का प्रयास किया तो मौजूद युवक बोल पड़ा हम बलीपुर नहीं मोहद्दीनगर के रहने वाले हैं। इतना बोल वह अपना काम करने लगा। मृतक प्रधान के घर पहुंचने पर पूरी तरह से सन्नाटा दिखा। आगे बढ़े तो डीएसपी एवं सुरेश का जहां शव पड़ा था, वहां दो बच्चे खेलते दिखे।
पहुंचने के पहले ही बच्चों ने सामने घर में घुसकर दरवाजा बंद कर दिया। जिस स्थान पर एसएसआई व गनर छिपे थे वहां पहुंचने पर महिलाएं, किशोरियां बाध बनाने के लिए मूंज कूट रही थीं। वे लोगों को अपनी ओर आते देख नीचे सिर कर अपने काम में लग गईं। कई बार आवाज लगाने पर भी उन्होंने अनसुना कर दिया।
एक वृद्धा सामने आई भी तो बिना किसी सवाल के ही बोली हम लोग कुछ नहीं जानते। कई लोग आए थे, उनके साथ पुलिस वाले भी थे। एक व्यक्ति कह रहा था साहब हम इसी में छिपे थे। बस केवल इतना हम लोगों ने सुना। लेकिन दिनभर में न जाने कितने लोग हम लोगों से पता नहीं क्या जानने के लिए आते हैं तथा सवाल करते रहते हैं। अमर उजाला की टीम हत्यारोपी कामता पाल के घर पहुंची तो वहां आसपास के लोग अपने घरों से ही देखते रहे।
एक युवक आया तो पूछा गया कामता के घर वाले आए नहीं। इस पर बोला उनका न तो फोन लग रहा है, न ही उक्त लोगों के रिश्तेदार ही आ रहे हैं। दस जानवर हैं उनके लिए हम लोग पुआल आदि की व्यवस्था कर पेट भर देते हैं तथा पानी पिला देते हैं। 14 दिन हो गया भैया न तो कोई आया, न किसी ने हालचाल लिया। सीबीआई की बाबत पूछने पर बोला पहले पुलिस वाले आते थे, अब सादी वर्दी में कुछ लोग गले में आईकार्ड जैसा टांगे आते हैं।
वे भी सिर्फ कामता के परिजनों के सम्बंध में पूछते हैं लेकिन जब हम लोगों को कुछ पता नहीं तो क्या बताएं। मृतक प्रधान नन्हें यादव के स्कूल में इंटर की परीक्षा चल रही थी। बाहर भारी मात्रा में फोर्स तैनात रही। बलीपुर गांव की महिलाएं सुबह शाम कुछ लेकर कछारों का रुख कर लेती हैं तो कई घंटे बाद ही लौटती है। जबकि घरों में चूल्हा तो जलता है लेकिन खाने वाले लोग नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में साफ लग रहा है कि लोग घरों को छोड़ कछारों में आशियाना बना चुके हैं।
देरशाम हत्यारोपी के घर गई थी सीबीआई
आठ दिनों से बलीपुर कांड की जांच में जुटी सीबीआई टीम अब दिन के साथ ही शाम को भी गांव का चक्कर लगाने लगी है। ऐसे में लोग अब और भी सशंकित रहने लगे हैं। गांव पहुंचने पर सीबीआई का नाम लेते ही जहां लोगों के मुंह पर ताला जड़ जाता है वहीं दबी जुबान कुछ बच्चे सीबीआई के शाम में गांव आने की बात बताते-बताते भाग जाते हैं। हत्यारोपी कामता पाल के पड़ोसी भी सीबीआई टीम के गुरुवार की देरशाम गांव आने की पुष्टि की है।