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पुलिसवालों के नाम एक गैंगरेप विक्टिम का खत

Thu, 11 Jul 2013 10:53 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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गोमतीनगर में चार साल की मासूम के साथ हुई दरिंदगी से आहत आशियान दुराचार कांड की पीड़ित किशोरी ने पुलिस वालों के जमीर को झकझोरने की कोशिश की है।
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उसने कुछ इस तरह पुलिस प्रशासन को आईना दिखाने की कोशिश की है।

शव देखकर जब आप लोग यह कहते हैं कि उसे कुत्तों ने नोंचा है, तो मैं कहना चाहूंगी कि कुत्ते भले ही जानवर हैं, लेकिन वो भी ऐसा नहीं करते।

इतनी छोटी सी बच्ची के साथ जो हुआ उस पर आपका रवैया इतना गैरजिम्मेदाराना कैसे हो सकता है।

पढ़े क्यों लिखा खत: यूपी: इस कातिल ने पार कर दीं हैवानियत की हदें

आप पढ़े लिखे हैं, पढ़ाई पूरी करने के बाद काफी सोचा-समझा होगा और खूब तैयारी करके पुलिस की नौकरी पाई होगी।

किसी ने आपको जबरदस्ती तो पुलिसवाला बनाया नहीं होगा। आप पर हमारी हिफाजत का जिम्मा है। बिना पढ़े लिखे और गरीब लोग जरूरत पड़ने पर आप ही के पास आएंगे और अगर आप मदद नहीं करेंगे तो कौन करेगा?

कौन उन्हें पकड़ेगा, जो दरिंदे बनकर शहर की सड़कों पर लड़कियों से हैवानियत करते हैं? उन्हें कौन रोकेगा, जो लड़कियों के साथ जानवरों सा व्यवहार करते हैं और उनकी जिंदगी को नर्क बना देते हैं।
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उन्हें किसने यह हक दिया कि वे जो जी चाहे करें और कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा?

हमें दुख होता है जब आप पीड़ितों से रुखा और डराने वाला व्यवहार करते हैं। डरना उन लोगों को चाहिए जो किसी बच्ची के साथ वो सब करते हैं जिसकी उसे समझ तक नहीं है। लेकिन आप उन्हें बिना जांच कैसे छोड़ देते हैं?

जांच तो करो, उस मां से पूछो तो सही कि हुआ क्या था जब अकेली सड़कों पर अपनी बच्ची को ढूंढने के लिए इधर-उधर बदहवास भागती फिरती है।
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