इलाहबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं कि उत्तर प्रदेश के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कालेजों में स्वीकृत पदों पर काम कर रहे अध्यापकों को ही वेतन का भुगतान किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने कहा है कि जिला स्तर के अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कालेजों में स्वीकृत पदों के लिए ही वास्तवित भुगतान किया जाए इससे अधिक नहीं।
इससे पूर्व न्यायालय के आदेश पर सरकार ने प्रदेश भर के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कालेजों में अध्यापकों और कर्मचारियों के स्वीकृत पदों की अधिसूचना जारी कर दी है।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अरुण टंडन की कोर्ट में सचिव माध्यमिक शिक्षा द्वारा हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि मान्यता प्राप्त और वित्तपोषित संस्थानों में स्वीकृत पदों की अधिसूचना जारी कर दी गई है।
कोर्ट ने इसमें पक्षकारों से आपत्तियां मांगी हैं। मामला ध्रुव नारायण सिंह द्वारा याचिका के माध्यम से उठाया गया। इसके मुताबिक बलिया के कई कालेजों में अध्यापकों तथा कर्मचारियों के स्वीकृत पदों से अधिक पदों पर वेतन का भुगतान किया जा रहा है।
कोर्ट ने 2010 में प्रदेश सरकार को जांच करने का निर्देश दिया था कि बलिया जिले में कितने कालेजों में कितने पद स्वीकृ हैं और उसके सापेक्ष कितने पदों के लिए भुगतान किया गया है। कितने लोग बिना स्वीकृत पदों पर काम करके वेतन प्राप्त कर रहे हैं।
यह भी निर्देश दिया कि प्रदेश भर के कालेजों में अध्यापकों और कर्मचारियों के स्वीकृत पदों की वास्तविक संख्या निर्धारण किया जाए। मुख्य सचिव को इसकी जांच कराने का निर्देश दिया गया।
कोर्ट ने पाया कि मामला पिछले तीन वर्षों से लंबित है। प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि स्वीकृत पदों का पता लगाकर अधिसूचना जारी की जाए अथवा सचिव माध्यमिक शिक्षा स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद सचिव माध्यमिक शिक्षा ने अवगत कराया कि अधिसूचना जारी कर दी गई है।