वाराणसी के हुकुलगंज में दो बच्चों और गर्भवती पत्नी को मौत की नींद सुला कर खुदकुशी करने वाला मोमोज विक्रेता किशन गुप्ता बीते 15 दिन से बेहद तनाव में था। गुरुवार को छोटे भाई प्रकाश ने बताया कि किशन भैया रोजाना कई बार शीशे में अपनी आंखों को देखते थे। कहते था कि परिवार को दोराहे पर नहीं छोड़ूंगा और सबको साथ लेकर दुनिया छोड़ जाऊंगा।
किशन भैया के मुंह से यह बातें सुन कर मां सावित्री देवी और वह उन्हें समझाते थे कि अच्छे से उपचार कराएंगे तो जल्द ही सब ठीक हो जाएगा। इस पर वह कहते थे कि आंखोें की रोशनी के बिना भविष्य अंधकारमय दिखता है। मैं घर बैठ जाऊंगा तो बच्चे और बीवी किसके सहारे जियेंगे...? प्रकाश ने कहा कि यदि किशन भैया के मन में चल रही बातोें की थोड़ी सी भी भनक लग गई होती तो हम लोग उन्हें अकेले न छोड़ते।
कैंट थाना अंतर्गत हुकुंलगंज निवासी कैंसर पीडि़त अमरनाथ गुप्ता के तीन बेटों में सबसे बड़ा किशन बुधवार की दोपहर अपने कमरे में फंदे के सहारे लटका मिला था। वहीं, उसकी पत्नी नीलम, बेटी शिखा और बेटा उज्ज्वल मृत पड़े मिले थे।
मौके से बरामद सुसाइड नोट के अनुसार किशन ने आंख की रोशनी कम होने की बीमारी से परेशान होकर परिवार के साथ जान दी है, इसमें किसी का दोष नहीं है। रात 11:30 बजे पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंपा तो हरिश्चंद्र घाट पर किशन और नीलम का अंतिम संस्कार किया गया, जहां मुखाग्नि प्रकाश ने दी।
वहीं, दोनों मासूम बच्चों का शव गंगा में प्रवाहित किया गया। इस हृदय विदारक घटना को लेकर परिजनों के साथ ही हुकुलगंज मुहल्ले के लोग भी स्तब्ध हैं। किसी को यकीन ही नहीं हो रहा है कि अपने काम से मतलब रख कर चुपचाप रहने वाला किशन गर्भवती पत्नी और दो बच्चों के साथ खुद की जिंदगी खत्म कर लेगा।