बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा है कि प्रदेश से कानून व्यवस्था नाम की चीज गायब हो चुकी है। इसकी वजह है कि सपा सरकार को साढ़े चार मुख्यमंत्री चला रहे हैं।
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, रामगोपाल, शिवपाल और आजम खान, ये चारों तो पूरे मुख्यमंत्री हैं, अखिलेश आधे मुख्यमंत्री के रूप में रह गए हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। यूपी की पहचान अब ‘क्राइम प्रदेश’ के रूप में होने लगी है।
सोमवार को जिला मुख्यालय पर आयोजित बसपा की मंडलीय समीक्षा बैठक में भाग लेने पहुंचे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि सपा सरकार में समाजवादी की परिभाषा बदल गई है। जो जितना बड़ा अपराधी है, वह उतना बड़ा समाजवादी है।
मुसलमान सबसे ज्यादा ठगे गए
सपा सरकार में मुसलमान सबसे ज्यादा ठगे गए हैं। चुनावी घोषणा पत्र में सपा ने मुसलमानों को आबादी के हिसाब से आरक्षण देने का वादा किया था। अब जब सरकार बन गई तो वादे से मुकरने लगी है। अब सरकार केंद्र को चिट्ठी लिखने की बात कर रही है। जबकि सपा ने जो वादा किया था वह पूरा करना प्रदेश सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
एक साल में 23 सांप्रदायिक दंगे
सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में आपराधिक घटनाओं के साथ-साथ छोटे-बड़े मिलाकर कुल 23 सांप्रदायिक दंगे हो चुके हैं। बरेली शरीफ, फैजाबाद, टांडा आदि स्थानों पर बड़े सांप्रदायिक दंगे हुए। प्रतापगढ़ में मारे गए सीओ की घटना से पूर्व वहां मौजूद स्थान नामक गांव में एक साथ 16 मुसलमान परिवार के घरों को जला दिया गया।
रौनापार थाने में थानाध्यक्ष की पिटाई की घटना पर उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं तो प्रदेश में आम हो चुकी हैं। थानेदार से लेकर अधिकारी तक कोई सुरक्षित नहीं है। आम जनता कितनी सुरक्षित होगी इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है। मुसलमानों की तरह सपा ने पिछड़ी जातियों को भी अनुसूचित जाति में शामिल करने का सब्जबाग दिखाया था, जो अधर में है।