आठ घंटे काम और मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर करते हुए श्रमिकों ने कारखानों पर जमकर हंगामा काटा। इसके बाद आक्रोशित श्रमिकों ने जाटवपुरी चौराहा पर जाम लगा दिया। सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंच गए। श्रमिकों को शांत कराने के दौरान पुलिस और श्रमिक नेताओं की झड़प भी हो गई। मामला बढ़ता देख श्रमिक नेता बैकफुट पर आ गए। बाद मं, पुलिस ने समझा-बुझाकर श्रमिकों को जाम खुलवाया। उधर, रामगढ़ पुलिस ने श्रमिक नेता शहजाद के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
श्रमिक नेताओं ने सोमवार सुबह कारखाना स्वामियों द्वारा नौ से दस घंटे काम लिए जाने का विरोध करते हुए जाटवपुरी चौराहा पर सभा की। श्रमिक नेता शहजाद की अध्यक्षता में आयोजित सभा में हड़ताल का निर्णय लिया गया। इसके बाद श्रमिक कारखानों को बंद कराने के लिए चल दिए। श्रमिक आगरा गेट स्थित भूरे खां ग्लास फैक्टरी पहुंचे। यहां फैक्टरी का गेट बंद था। चौकीदार द्वारा गेट न खोलने पर श्रमिकों ने पथराव कर दिया। फैक्टरी मालिकों के आने पर गेट खोला गया तो श्रमिक जबरन अंदर प्रवेश कर गए। इसको लेकर श्रमिकों की फैक्टरी मालिक से तकरार भी हुई। सुपर ग्लास, दिनेश ग्लास, कोहिनूर ग्लास, जनता ग्लास सहित अन्य कारखानों को बंद कराते हुए श्रमिक पुन: जाटवपुरी चौराहा पर एकत्रित हो गए। यहां श्रमिकों ने जाम लगा दिया। जाम की सूचना पर नगर मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार सीओ सिटी राजेश चौधरी के साथ पहुंच गए। पुलिस ने जाम खुलवाने का प्रयास किया, तो श्रमिक नेताओं की पुलिस से झड़प हो गई। मामला बढ़ता देख श्रमिक नेता बैकफुट पर आ गए और जाम खोलने के साथ ही पुन: सभा करने लगे। हालांकि इसके बाद पुलिस ने सभा भी नहीं होने दी। मामले में रामगढ़ पुलिस ने श्रमिक नेता शहजाद के खिलाफ हाईवे जाम, शहर की फिजां खराब करने और अराजकता फैलाने का मामला दर्ज कर लिया है। थानाध्यक्ष रामगढ़ का कहना है कि आरोपी श्रमिक नेता को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
श्रमिकों में यूंं ही नहीं भड़का आक्रोश
श्रमिक लंबे समय 50 रुपये बढ़ोत्तरी की मांग कर रहे हैं। गत वर्ष बढ़ोत्तरी का मामला टाल दिया गया था। हाल ही में हुई वार्ता में भी सेवायोजक बढ़ोत्तरी के मूड में नहीं दिखे। ऐसे हालात में श्रमिकों में आंदोलन की चिंगारी भड़क रही थी, जो सोमवार को फूट पड़ी।
छह दर्जन से अधिक कारखानों में पसरा सन्नाटा
श्रमिकों ने हंगामा करते हुए चूड़ी के छह दर्जन से अधिक कारखानों में काम पूरी तरह बंद कर दिया। श्रमिकों द्वारा कार्य छोड़कर चले जाने के कारण अधिकांश कारखानों में सन्नाटा नजर आया।
उद्योग जगत पर पड़ी दोहरी मार
श्रमिकों द्वारा विरोध प्रदर्शन के चलते उद्योग जगत पर दोहरी मार पड़ी। कारखाने बंद होने के कारण लाखों रुपये की गैस फुंक रही है। पॉट फर्नेश के एक कारखाने में प्रतिदिन चार टन गैस की खपत होती है, जिसकी कीमत करीब 80 हजार है। वहीं एक कारखाने में हर रोज 3500-3600 तोड़े बनते हैं, काम बंद होने के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ।
पांच दिन के निर्णय पर एकमत नहीं उद्यमी
मंदी के दौर से उबरने को सप्ताह में पांच दिन काम चलाने के निर्णय पर कई उद्यमी एकमत नजर नहीं आए। यही कारण रहा कि शनिवार व रविवार कई कारखाने बंद रहे वहीं कुछ कारखाने बदस्तूर चलते नजर आए।