फिरोजाबाद। जिले में डेंगू एवं वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ने के मुख्य कारणों में घुमंतू एवं दूध उत्पादक डेयरियों से निकलने वाले मवेशियों के मलमूत्र भी प्रमुख है। इस मामले में विकास प्राधिकरण की लापरवाही सामने आई है। जानकारों के शासनादेश के बाद भी विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार अफसरों ने शहर के बाहर कैटल कॉलोनी निर्माण संबंधी योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया।
स्वास्थ्य विभाग ने घुमंतू अथवा डेयरी में पल रहे दुधारू पशुओं के मलमूत्र का उचित निस्तारण नहीं होने से संक्रामक बीमारी डेंगू और वायरल फैलने की आशंका व्यक्त की है। खास तौर पर नगर निगम क्षेत्र में संचालित डेयरियों से निकलने वाले मवेशियों के मलमूत्र का उचित निस्तारण नहीं होने से मक्खी-मच्छर पनप रहे हैं। हालांकि शासन ने कई वर्षों पहले ही घुमंतू जानवरों और शहरी क्षेत्र में संचालित डेयरियों से निकलने वाले मवेशियों के मलमूत्र का उचित निस्तारण कराने के साथ ही निगम क्षेत्र से बाहर उपयुक्त जगहों पर कैटल कॉलोनी विकसित करने के आदेश दिए थे।
इस संबंध में 24 जून 1998 को इस आशय का पहला पत्र विकास प्राधिकरण को जारी किया गया। सूत्रों की मानें तो वर्ष 2002 और 2012 में सचिव स्तर एवं उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की ओर से वर्ष 2019 के बीच कई बार पत्राचार कर आबादी क्षेत्रों से बाहर कैटल कॉलोनी विकसित किए जाने के निर्देश जारी किए। इन सबके बाद भी विप्रा के जिम्मेदार अफसरों ने शासन की सलाह को नजरअंदाज कर दिया। परिणाम स्वरूप शहर के आंतरिक भागों में एक-दो और कई-कई मवेशियों वाली दूध डेयरी निगम क्षेत्र में स्थापित हो गईं और मवेशियों के मलमूत्र के निस्तारण संबंधी उचित प्रबंध की किसी ने भी सुध नहीं ली।
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कुछ आवश्यक तथ्य-
-शहर के आंतरिक भागों में अनुमानत: संचालित हैं- 2000 दूध डेयरी
-डेयरियों में दुधारू मवेशियों की संख्या अनुमानत:-10000गाय-भैंस
-जिला में संचालित कुल निराश्रित गौवंश आश्रय स्थलों की संख्या--46
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कैटल कॉलोनी के संबंध में निर्देश तो मिले लेकिन हमारे पास कैटल कॉलोनी विकसित करने के लिए भूमि नहीं है और न ही अन्य जरूरी संसाधन। घनी आबादी से डेयरियों को दूसरी जगह स्थानांतरित कराने का काम नगर निगम का है।
कप्तान सिंह एक्सईएन शिकोहाबाद-फिरोजाबाद विकास प्राधिकरण