ग्रामीणों ने बताया कि कई वर्षों से खेरे वाली माता मंदिर को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने के लिए तहसीलों के चक्कर काटते-काटते परेशान हो गए हैं, किंतु कोई सुनवाई नहीं की गई। इसके साथ ही ग्राम पंचायत के गांव नगला हृदय में अंत्येष्टि स्थल पर टिनशेड न होने पर ग्रामीणों को चिताओं को खुले में जलाना पड़ रहा है।
टूंडला के लाइनपार क्षेत्र के खेरे वाली माता मंदिर को राजस्व अभिलेखों में दर्ज न किए जाने, गांव में शवदाह स्थल पर टिनशेड न होने एवं अन्य समस्याओं को लेकर गांधी जयंती पर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत ग्रामीण धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने गांधी के वेश में तीन बच्चों को बंदरों के रूप में बैठाकर गांधीवादी तरीके से प्रशासन के विरुद्ध धरना शुरू कर दिया।
ग्राम पंचायत रुधऊ मुस्तकिल के गांव खेरे वाली माता मंदिर पर समाजसेवी रामप्रकाश कुशवाह के नेतृत्व में शाम करीब चार बजे गांधीवादी तरीके से तीन बंदरों के वेश में धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से खेरे वाली माता मंदिर को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने के लिए तहसीलों के चक्कर काटते-काटते परेशान हो गए हैं, किंतु कोई सुनवाई नहीं की गई। इसके साथ ही ग्राम पंचायत के गांव नगला हृदय में अंत्येष्टि स्थल पर टिनशेड न होने पर ग्रामीणों को चिताओं को खुले में जलाना पड़ रहा है।
उन्होंने खेरे वाली माता मंदिर को राज्सव अभिलेखों में व अंत्येष्टि स्थल पर टिनशेड डलवाए जाने, क्षेत्र में लाइब्रेरी बनवाने, संपर्क मार्ग सही कराने, गांवों में लाइटें लगवाने, नाली-खरंजे बनवाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही उन्हें उक्त कार्य पूर्ण कराने के लिए ठोस आश्वासन नहीं मिलता तो वे आंदोलन को जारी रखेंगे। धरना-प्रदर्शन पर बैठने में रामवीर बघेल, धनीराम निषाद, चौब सिंह, पप्पू, हीरालाल, बलराम, रामलखन, भोला निषाद, रामवीर बघेल, प्रताप सिंह, सोनू, अनिल बघेल आदि हैं।