टूंडला। प्रदेश सरकार के आदेश हैं कि किसी भी विभाग में प्राइवेट लोग नहीं रहेंगे, लेकिन टूंडला तहसील में सरकार के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। तहसील में लेखपालों के नीचे लगभग आधा सैकड़ा प्राइवेट लोग कार्य कर रहे हैं।
टूंडला तहसील में 23 लेखपाल हैं शायद ही कोई लेखपाल ऐसा होगा जिसके नीचे प्राइवेट कर्मचारी काम नहीं कर रहे हों। सभी लेखपालों के नीचे दो-दो प्राइवेट कर्मचारी काम कर रहे हैं। इस प्रकार लेखपालों के साथ करने वाले इन कर्मचारियों की संख्या करीब 46 हो जाती है। इसके अलावा तहसील में अन्य विभागों में भी प्राइवेट कर्मचारी काम कर रहे हैं। लेखपालों के साथ लगे प्राइवेट कर्मचारियों का काम क्षेत्र में जाकर पैमाइश करना, लोगों के आय व जाति प्रमाणपत्र बनाना, बिरासत का काम करना आदि है।
इसकी जानकारी तहसील क्षेत्र के सभी लोगों को है। कोन किस लेखपाल या विभाग में कार्य कर रहा है उसी से क्षेत्रीय लोग संपर्क करते हैं। स्थिति यह है लेखपाल शायद ही कभी तहसील में मिलते हैं। उनसे जिनको काम होता है वो केवल भटकते ही रहते हैं। मजबूरी में लोगों को प्रावइवेट युवकों से ही संपर्क कर अपना कार्य कराना पड़ता है।
ऐसे मिलता है प्राइवेट कर्मचारियों को वेतन
तहसील में जितने भी प्राइवेट युवक कार्य कर रहे हैं। उनका वेतन आखिर कैसे निकलता है। जब इन युवकों से हुई बात हुई तो उन्होंने बताया कि क्षेत्र में वहां से पैमाइश आदि के नाम पर जो धनराशि ग्रामीणों से प्राप्त होती है, उसमें से बड़ा हिस्सा संबंधित लेखपाल का होता है। जो हिस्सा बचता है उसको वे स्वयं रख लेते हैं यही उनका वेतन होता है।
तहसील में प्राइवेट कर्मचारी की जानकारी नहीं है। अगर तहसील या लेखपाल के साथ कोई प्राइवेट कर्मचारी काम करते मिला तो उसके व संबंधित तहसीली कर्मचारी के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
डाॅ. गजेंद्रपाल सिंह, एसडीएम