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यहां तो मुसीबतों की बरसात है मानसून

Mon, 15 Jun 2015 11:30 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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मानसून की दस्तक से किसान व आमजन भले ही खुश हों लेकिन सुहागनगरी के आधा दर्जन मोहल्लों के बाशिंदे तो यही दुआ करते हैं अल्लाह ताला यहां कभी मानसून ही नहीं आए। बारिश के साथ उनकी मुसीबत बढ़ जाती है। मकान पानी से घिरते हैं। निगम जलनिकासी का कोई हल अभी तक नहीं खोज पाई। बारिश के दौरान रणनीति बनाने के दावे तो कई बार किए लेकिन बारिश बंद होने के साथ प्लानिंग भी हर बार बंद हो जाती है।
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 नगला बरी चौराहे से बंबा बाईपास से लेकर आसफाबाद तक बसे नई आबादी वाले क्षेत्र का हाल बेहाल है। आसमान में काली घटाओं के घिरने के साथ नई आबादी वाले मोहल्ला किशन नगर, दुर्गेश नगर, रहीम नगर, ताड़ों वाली बगिया, मोमिन नगर, मदीना मस्जिद के करीब वाले मोहल्लों के बाशिंदों की भी धड़कनें तेज हो गईं। चिंता यही कि बारिश होते ही उनके घर पानी से घिरे दिखेंगे। कइयों को तो मकानों की छतों पर त्रिपाल लगाकर घरेलू सामान रखने और रात गुजारने को विवश होना पड़ेगा। बारिश के दिनों में बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते। सीवर लाइन तो डाली है लेकिन क्षमतानुसार नहीं है। दुर्गेशनगर निवासी नसरुद्दीन ने मकान से सामान कम करना शुरू कर दिया तो मोहम्मद जमील ने अभी से सामान निकाल लिया। सिर्फ रोज उपयोग आने वाला ही सामान रहेगा। इशकार अहमद का कहना है कि हम तो चार से पांच फीट पानी से होकर निकलते हैं। गरीब हैं और कोई ठिकाना भी नहीं जब हालत सुधरेंगे तब देखेंगे। तारिक कहते हैं कि गंदा पानी घरों में भरता है। इंतजार अहमद ने कहा कि निगम के अधिकारी सिर्फ कागजी कार्रवाई करते हैं।

नलकूप के करीब गंदगी का आलम
लालपुर हजीरा के समीप लगे नलकूप के करीब गंदगी का आलम है। कीचड़ के बीच से पानी की पाइप लाइन जा रही है। गंदगी संक्रामक रोग फैला सकती है। निगम के अधिकारी नलकूप के आस-पास मिट्टी और खड़ंजा कराने की ओर भी ध्यान नहीं देते ताकि लोगों को पीने का पानी तो शुद्ध मिल सके। सीधे आपूर्ति करने वाले नलकूपों पर डोर क्लोजर नहीं लगाए गए।
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बोली जनता, नहीं हमारा ख्याल
- दुर्गेशनगर निवासी मुबीना बेगम ने कहा कि बारिश आते देख सामान को कम करना शुरू कर दिया। जब ज्यादा पानी भरता है तो फिर मकानों की छतों पर त्रिपाल लगाकर रहते हैं।

किशन नगर निवासी मोहम्मद अख्तर कहते हैं कि पानी के भरने के कारण हमने तो मकान ही बिक्री करने का फैसला कर लिया है। करें क्या जब विकास ही नहीं हुआ तो फिर मकान की बिक्री करना मजबूरी है। किराए पर लेकर रहेंगे।

मोहम्मद जमील कहते हैं कि चार-चार फीट भरे पानी से होकर बारिश में निकलते हैं। मकानों के गिरने की आशंका रहती है। चहुंओर पानी ही पानी होता है। जल निकासी की कोई व्यवस्था ही नहीं की।

नुरुलहुदा लाला राइन ने कहा कि नई आबादी के विकास की ओर ध्यान नहीं दिया। निगम के अफसरों से कई बार मिले। सिर्फ कोरा आश्वासन दिया। क्षेत्र की जनता ने अभी से मकानों को खाली करना शुरू कर दिया।
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