क्वालिटी पर संदेह होने पर टीम ने पनीर का सैंपल भरा। पनीर को जांच के आधार पर नष्ट करवा दिया गया। आगरा निवासी योगेंद्र गौतम धौलपुर से इस पनीर को खरीद कर फिरोजाबाद में सप्लाई करने के लिए आता था।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में दूसरे जनपद से नकली पनीर की सप्लाई हो रही है। बुधवार को पांच क्विंटल नकली पनीर को नष्ट कराया गया। यह पनीर धौलपुर से फिरोजाबाद में सप्लाई के लिए आ रहा था। पनीर में रिफाइंड की खुशबू आ रही थी। टीम ने सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेज दिया है। जिले में भारी मात्रा में मिलावटी पनीर आने की सूचना पर टीमें कई दिनों से सक्रिय थीं।
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मंगलवार देर रात पनीर के फिरोजाबाद में पहुंचने की जानकारी मिलने पर सहायक आयुक्त डॉ. सुधीर कुमार ने टीम को अलर्ट कर दिया। देर रात से ही टीम ने हाईवे पर नजर रखना शुरू कर दी। इधर पनीर से भरी हुई गाड़ी रात में सुहागनगर पहुंच गई। खबर मिलते ही टीम ने यहां पर छापा मारा तथा पनीर की गाड़ी को रुकवाकर देखा तो पनीर में रिफाइंड जैसी गंध आ रही थी।
पनीर की क्वालिटी पर संदेह होने पर टीम ने पनीर का सैंपल भरा। वहीं सहायक आयुक्त डॉ. सुधीर सिंह ने पनीर को जांच के आधार पर नष्ट करवा दिया। आगरा निवासी योगेंद्र गौतम धौलपुर से इस पनीर को खरीद कर फिरोजाबाद में सप्लाई करने के लिए आता था। उसके पास में खाद्य विभाग का लाइसेंस भी नहीं है, जबकि खाद्य पदार्थ की सप्लाई एवं बिक्री के लिए लाइसेंस जरूरी है।
140 में खरीदकर 180 रुपये किलो बेचता था
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की पूछताछ में योगेंद्र ने बताया कि वह धौलपुर से 140 रुपये किलो की दर से पनीर को खरीदता है तथा 170 से 180 रुपये किलो में फिरोजाबाद में बेच देता है। खाद्य विभाग की टीम ने शनिवार को सड़क पर दूध से भरे हुए ई रिक्शा को पकड़ा। इसमें करीब 400 लीटर दूध भरा हुआ था। संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने इसका भी सैंपल भरा।
डेयरी से भरा पनीर का सैंपल
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने आसफाबाद फाटक स्थित योगेंद्र सिंह की गोपाल डेयरी से भी पनीर का सैंपल भरा है। यहां पर पहुंची टीम को जांच के दौरान पनीर पर संदेह हुआ। इस पर यहां से सैंपल भरा गया है। वहीं रानीपुरा दतावली निवासी मनोज के गाय के दूध में मिलावट के संदेह पर इसका भी सैंपल टीम ने भरा है।
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पनीर प्रारंभिक जांच में ही मिलावटी प्रतीत हो रहा था। इसका सैंपल भरा गया है। इसके बाद में पांच क्विंटल पनीर को तालाब में फिंकवा दिया। खाद्य कारोबारी के पास में लाइसेंस भी नहीं था। -डॉ. सुधीर कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग