फिरोजाबाद। रूस-यूक्रेन युद्ध पर फिरोजाबाद के कांच निर्यातकों की पैनी नजर है। उद्यमी पलपल की जानकारी के साथ ही विदेशी ग्राहकों से लगातार संपर्क में है। फरवरी-मार्च में कारोबारी रफ्तार बढ़ने की उम्मीद में बैठे सुहागनगरी के कांच निर्यातकों को रूस-युद्ध से तगड़ा झटका लगा है। सोडा एस के दाम फिर बढ़ गए हैं। सिल्वर पॉलिश और पैकिंग पेपर के रेट भी बढ़ गए हैं। यूरोप के अन्य देशों में अशांति बढ़ने की आशंका एवं कच्चे माल के दामों में बढ़ोतरी के कारण विदेशों से मिले आर्डरों को तैयार करने में लागत भी बढ़ जाएगी।
रूस-यूक्रेन युद्ध ने पहले यूरोपीय देशों में कांच उत्पादों के निर्यात पर तो असर डाला। कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त सिल्वर, सोडा और पैकिंग पेपर की दरें भी बढ़ गईं है। सोडा एस के दाम रविवार से फिर से दो रुपये बढ़ गए। कांच कारोबारियों के अनुसार रविवार को सोडा एस के डीलरों ने कारखानों में 46 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब सोडा एस का बिल भेजा है। वहीं अभी तक 14-15 हजार रुपये किलोग्राम वाली चांदी यानि सिल्वर पॉलिश के दाम भी 17000 रुपये तक पहुंच गए हैं। कांच उत्पादों की पैकिंग में खपने वाले कागज के दाम भी तीन रुपये बढ़ गए। पैकिंग पेपर की वर्तमान दर 42 रुपये प्रति किलोग्राम रही।
विदेशी आर्डर की दर और कांच उत्पाद तैयार करने की लागत के बीच मामूली अंतर होता है। जिसे हम मुनाफा के तौर पर देखते हैं। लेकिन अब कच्चे माल की दरें हमारी चिंता का कारण हैं। अगर कच्चे माल की दरें कम नहीं हुई तो विदेशी आर्डरों से मुनाफा कम और नुकसान ज्यादा होगा।
उवैस मुकर्रम, कांच उत्पादों के निर्यातक
रूस युद्ध शुरू होने के बाद निर्यात योग्य कांच उत्पादों की मांग में कमी आई है। हमारी चिंता है कि अगर यूरोप के अन्य देशों में अशांति पैदा हुई तो फिर कांच कारोबार जगत को संभालना मुश्किल होगा। निर्यातकों व स्वदेशी सप्लायर्स की माने तो अन्य देशों के ग्राहक भी पुराने आर्डरों को स्थगित करने की बात कह रहे हैं।
सरवर हुसैन, कांच उत्पादों के निर्यातक