इस प्रकरण में राजस्थान पुलिस की जांच व शासन स्तर पर गठित जांच समितियों की आख्या में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। वहीं, इस मामले में कुलाधिपति व कुलसचिव की गिरफ्तारी हो चुकी है। मंत्री ने बताया कि जेएस विश्वविद्यालय द्वारा अधिनियम की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन किया गया है। इसमें डिग्री देने की शक्ति के दुरुपयोग, संगठित अपराध के रूप में फर्जी अंकतालिकाओं व डिग्रियों का वितरण, आवश्यक भूमि मानक का पालन न करना तथा उच्च शिक्षा परिषद को अनिवार्य विवरण उपलब्ध न कराना भी शामिल है। इन सभी तथ्यों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद की मान्यता रद्द करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही विश्वविद्यालय के सभी अभिलेख डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रखे जाएंगे। उन्हीं अभिलेखों के आधार पर पूर्व में जारी मार्कशीट व डिग्रियों का प्रमाणीकरण किया जाएगा। साथ ही, मान्यता रद्द होने की अवधि के दौरान विश्वविद्यालय की गतिविधियों के संचालन हेतु धारा 55 (6) के तहत तीन सदस्यीय अंतरिम समिति गठित करने का भी विभाग ने निर्णय लिया है।
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