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पंच महायोग के संयोग लाएंगे बसंत पंचमी पर खुशहाली

Tue, 09 Feb 2016 09:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो फीरोजाबाद
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सरस्वती की वंदना का महापर्व इस बार महासंयोग के साथ आएगा। बसंत पंचमी पर योगों का पंच संयोग सुख और समृद्धि की वर्षा करेगा। 12  फरवरी को मनाई जाने वाली बसंत पंचमी पर सालों बाद पंच महायोग का संयोग बन रहा है। इस दिन ध्वज योग, साध्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग पड़ रहे हैं। पंच महायोग के संयोग में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी होगा।
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  बिहारी जी मंदिर के मुख्य महंत पं. मुन्नालाल शास्त्री ने बताया कि इस दिन शनि प्रधान उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र है। वहीं चंद्रमा मीन राशि में है, जो कि गुरु प्रधान है। इसे विद्या का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में इस दिन विद्याध्ययन करने वालों को सरस्वती पूजन से अत्यंत लाभ होगा। पंच महायोग में सरस्वती पूजन के साथ  महाकाली की आराधना करने से धन-धान्य, शक्ति और संपन्नता का मार्ग प्रशस्त होगा। देवी भागवत पुराण के अनुसार आद्य शक्ति के तीन रूप महाकाली, महा लक्ष्मी,  महा सरस्वती हैं। मनुष्य के कल्याण के लिए भगवती महा सरस्वती का बसंत पंचमी के दिन प्रादुर्भाव हुआ। यह विद्या और बुद्धि की देवी हैं। इस दिन किए गए पूजन से भगवती की कृपा श्रद्धालुओं पर होती है। आज के दिन बच्चों का विद्यारंभ संस्कार भी कराया जाता है।
 12 फरवरी को सुबह 9.18 बजे से पंचमी तिथि प्रारंभ होगी जो कि 13 फरवरी को सुबह 6.41 बजे समाप्त होगी। ऐसे में बसंत पंचमी 12 फरवरी को शास्त्र सम्मत होगा। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 9.07 बजे से शुरू होकर 13 फरवरी को दोपहर 3.35 मिनट तक रहेगा। 12 फरवरी को रवि योग सुबह 9.07 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में पूजन अर्चन से कामनाओं की पूर्ति होगी।
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पूजन विधि
 एक वेदी बनाएं, उस पर पीले अक्षत से अष्टदल कमल बनाएं। उसके अग्रभाग में गणेश जी, पीछे के भाग में बसंत बनाएं। मिट्टी के पात्र (बसंत) में जौ, गेहूं की बाली और पीले फूल, आम के बौर रखें। यही भगवती सरस्वती का स्वरूप होगा। उनके सम्मुख ‘श्रीं हृीं सरस्वत्यै स्वाहा:’ मंत्र का जाप करें।  सरस्वती के मूल मंत्र ‘श्री हृीं सरस्वत्यै स्वाहा:’  अष्टाक्षर  मंत्र से देवी का पूजन और स्मरण करना चाहिए। ऊंची शिक्षा में सफल होने वाले व्यक्ति को सरस्वती पूजा वाले दिन किसी ब्राह्मण को वेदशास्त्र का दान करना चाहिए।


बच्चे की जीभ पर लिखें शब्द
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि बसंत पंचमी पर छोटे बच्चों को अक्षर अभ्यास करवाने से वह कुशाग्र बुद्धि का होता है। इस दिन  माता-पिता अपने बच्चे को गोद में लेकर चांदी अथवा अनार की कलम में शहद से  बच्चे की जीभ पर ‘ऐंÓ लिखें और सरस्वती पूजन करें। इस दिन घरों में काले रंग की पट्टी और चाक (खड़िया) का भी पूजन करें। सरस्वती स्वरूपा कलम और पुस्तक का पूजन  करना चाहिए।

चांदी के चम्मच से खीर खिलाएं
बसंत पंचमी के दिन छह माह तक के बच्चों को पहली बार अन्न खिलाने की परंपरा भी निभाई जाती है। इसे अन्न प्राशन संस्कार अर्थात बच्चे को पहली बार अन्न खिलाना कहते हैं। इस दिन दूध पीते बच्चे को नए कपड़े पहनाकर, चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर और बच्चे को बिठाकर मां सरस्वती की आराधना करके चांदी के  चम्मच से खीर खिलाएं।

ब्रह्मा ने सरस्वती की वीणा से की थी स्वर की उत्पत्ति
 शास्त्रीय मान्यता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि की उत्पत्ति की लेकिन सृष्टि में नीरसता थी। इस पर माघ शुक्ल पंचमी तिथि को मां सरस्वती की वीणा से स्वर की उत्पत्ति हुई। यह भी मान्यता है कि माघ शुक्ल पंचमी को जब कुंभकर्ण ने वरदान मांगना चाहा कि वे मात्र एक दिन सोएं और छह माह तक जागते रहे। इस पर सरस्वती देवी कुंभकर्ण की जिह्वा पर बैठ गई और कुंभकर्ण की मति घूम गई। इससे कुंभकर्ण ने छह माह जागने के स्थान पर छह माह सोने का वरदान मांग लिया।
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