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डेढ़ माह बाद स्कूलों में फिर लौटी रौनक, पहले दिन पटरी पर नहीं आ सकी शिक्षा

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फिरोजबाद। करीब डेढ़ माह बाद खुले विद्यालयों में पहले दिन बहुत कम संख्या में बच्चे पहुंचे। अधिकांश विद्यालयों में छात्र संख्या एक चौथाई भी नहीं दिखी। परिषदीय विद्यालयों में अधिकांश शिक्षक मतदान प्रशिक्षण के कारण नहीं पहुंच सके। जो शिक्षक, शिक्षामित्र बीएलओ हैं वे घर-घर वोटर पर्ची बांट रहे हैं। इसके चलते शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी। वहीं कोविड संक्रमण से बचाव के लिए कुछ विद्यालयों में सैनिटाइजर रखे मिले।
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बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय 31 दिसंबर 2021 से बंद चल रहे थे। पहले 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश घोषित किया गया, इसके बाद कोरोना की तीसरी लहर की वजह से विद्यालय पूरी तरह से बंद कर दिए गए। कोरोना की गति मंद पड़ने पर सोमवार से विद्यालयों में भौतिक कक्षाएं शुरू की गईं।
पहले दिन बहुत कम संख्या में बच्चे स्कूल पहुंचे। वहीं, प्राइवेट स्कूलों में पहले दिन क्लास संचालित हुईं। हालांकि छात्रों की उपस्थिति वहां भी कम होने से पढ़ाई का माहौल नहीं बन सका। शासन के निर्देश पर स्कूलों में कोविड हेल्प डेस्क की स्थापना एवं मास्क की अनिवार्यता रखी गई थी, लेकिन अधिकांश विद्यालय कोरोना गाइड लाइन का पालन करते नहीं दिखे।
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बीएसए अंजली अग्रवाल ने कहा कि विद्यालय का समय सुबह नौ से शाम तीन बजे तक हैं, उसी के अनुसार स्कूलों को खोला जाएगा। पहला दिन होने के कारण 20 फीसदी ही छात्र संख्या रही।
बच्चों के चेहरे पर दिखी खुशी
टूंडला। 42 दिन के बाद सोमवार से खुले परिषदीय स्कूलों में पहुंचे बच्चों के चेहरे पर खुशी दिखाई दी। कक्षा एक से पांचवी तक के बच्चे स्कूल पहुंचे। इस दौरान कोविड नियमों का ख्याल रखा गया।
स्कूलों में गेट पर बच्चों तापमान चेक किया और सैनिटाइजेशन के बाद ही कक्षा में प्रवेश कराया गया। बच्चे मास्क पहनकर कक्षाओं में पहुंचे और पहले दिन-एक दूसरे से हालचाल जाना। पहले दिन बच्चों की उपस्थिति कम रही। माना जा रहा है कि चुनाव के बाद बच्चों की संख्या बढ़ेगी। संवाद
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