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दस साल से नेचुरल गैस के इंतजार में ‘शोपीस’ बनीं 18 कांच इकाइयां

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दस साल से नेचुरल गैस के इंतजार में ‘शोपीस’ बनीं 18 कांच इकाइयां
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- जरूरी औपचारिकता पूरी कराने के बाद भी नहीं मिल सकी है गैस की आपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। जरूरी औपचारिकता पूरी करने एवं गेल इंडिया में नियमानुसार जमानत राशि जमा कराने के बाद भी फिरोजाबाद की लगभग 18 कांच इकाइयां 10 साल से गैस सप्लाई के इंतजार में ‘शोपीस’ बन गईं हैं। हितकारी पकाई भट्टी एसोसिएशन ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार के अलावा टीटीजेड अथॉरिटी को अपना मांग पत्र देकर गैस आपूर्ति जारी करने की गुहार लगाई है।
वर्ष 2012 से फिरोजाबाद की कुल 18 कांच इकाइयों को गैस कोटा जारी होने का इंतजार अभी भी बरकरार है। लाखों-करोड़ों की लागत से तैयार हुई इन इकाइयों ने गैस कोटा हासिल करने के लिए जरूरी औपचारिकता पूरी कराने के साथ ही जिम्मेदार विभागों की एनओसी तक हासिल कर ली है। खास बात है कि इन इकाइयों की जमानत राशि भी गेल इंडिया लिमिटेड में जमा कराई जा चुकी है। लेकिन इसके बावजूद इसके गैस कोटा जारी नहीं होने के कारण शोपीस की भांति खड़ीं इकाइयों के भागीदारी अथवा मालिकान प्रति वर्ष लाखों की धनराशि रखरखाव के नाम पर फूंक रहे हैं।
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इन इकाइयों को है गैस सप्लाई का इंतजार
वर्ष 1996 की सूची में शामिल अथवा वर्ष 2010 तक उत्पादन प्रक्रिया चालू करने को जरूरी तैयारी करने वाली कुल 18 इकाइयों में जिंदल रिफेक्ट्री, लक्ष्मी ग्लास, नासरी ग्लास, सुशीला ग्लास, ताज ग्लास, कढा-छाल पकाई कॉटेज, एम्पायर ग्लास, गंगा ग्लास, नन्नूमल-वीरेद्र कुमार ग्लास इंडस्ट्रीज, द सेट्रल साबरी ग्लास, इंद्रा बीड्स, जीपी जैन ग्लास इंटर प्राइजेज, दीपक केमिकल, बंसल केमिकल, सुप्रीम ग्लास वर्क्स, पापुलर ग्लास वर्क्स, पकाई भट्टी हितकारी, दुुर्गा-लक्ष्मी आयरन फाउण्ड्री के नाम शामिल हैं।
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महज 60-70 हजार टन गैस कोटा की है दरकार
लगभग दस साल पूर्व जरूरी औपचरिकता पूरी कराने एवं जमानत राशि जमा कराने वाली उपरोक्त सभी इकाइयों को महज 60-70 हजार टन नेचुरल गैस की दरकार है। इनमें कई तो महज 800 घनमीटर अथवा अधिकतम 5000 घनमीटर तक गैस की सप्लाई की मांग कर रहीं हैं।इसके अलावा उक्त सभी इकाईयां अगर संचालित हो जाएं तो करीब 5000 परिवार को आजीविका का साधन सुलभ होंगे।
इकाइयों के मालिक-भागीदारों की बात
हमने वर्ष 2012-14 गैस सप्लाई के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी करा लीं। इसके अलावा गेल इंडिया को नियमानुसार धरोहर राशि भी जमा करा दी। जब नेचुरल गैस छोटी व अति सूक्ष्म इकाइयों को जारी किए जाने का नियम है तो फिर हमें क्यों वंचित रखा जा रहा है।
- मनोज कुमार, अध्यक्ष, हितकारी चूड़ी पकाई भट्टी एसोसिएशन
-जरूरी औपचारिकता पूरी कराने के बाद हम लगभग 10 वर्ष से गैस सप्लाई की मांग कर रहे हैं। लोगों को आजीविका के साधन मुहैया कराने एवं स्टार्ट अप योजना के क्रियान्वयन में जुटीं सरकारें 10 साल से गैस की मांग कर रहीं इकाइयों की भी सुध लें। 10 साल से शोपीस बनी खड़ी इन इकाइयों पर वार्षिक रखरखाव के नाम पर लाखों की धनराशि खर्च हो रही है।
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- विनय कुमार अग्रवाल संचालक(मालिक), नन्नूमल-वीरेद्र कुमार ग्लास इंडस्ट्रीज
वर्जन
2014 से पहले जिन कांच इकाईयों ने गैस आपूर्ति के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली थी, उन सभी की रिपोर्ट टीटीजेड कमेटी को सौंपी दी है। 2014-15 के दरम्यान एनजीटी द्वारा लगाई गई पाबंदी के कारण इन इकाईयों को गैस की आपूर्ति नहीं हो सकी है।
अमरेश पांडेय
उपायुक्त उद्योग
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