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मीट व्यापारी लामबंद, डीएम से मिले

Mon, 27 Mar 2017 11:36 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
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मीट विक्रेताओं ने डीएम से मुलाकात की।
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अवैध कट्टीघरों को चालू कराने की मांग को लेकर मीट कारोबारी सोमवार को डीएम से मिले। उनका कहना था कि मोहल्ला कुरैशियान में संचालित होने वाले कट्टीघर का लाइसेंस था फिर भी पुलिस ने उसको बंद करा दिया। कट्टीघर के बंद होने के साथ ही मीट कारोबारियों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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मीट विक्रेताओं ने कहा कि लाइसेंस का नवीनीकरण कराने के लिए मांस कारोबारी नगर निगम भी पहुंचे थे लेकिन निगम अधिकारियों ने नए लाइसेंस बनाने और पुराने लाइसेंस नवीनीकरण से मना कर दिया। मीट व्यापारी सोमवार को डीएम नेहा शर्मा से मिलने के लिए जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने डीएम को ज्ञापन देने के साथ ही पशु वध का कार्य के लिए लाइसेंस जारी करने की मांग की।
मीट बाजार में भी सन्नाटा
मोहल्ला कुरैशियान में स्लाटर हाउस संचालित होने के साथ ही नालबंद पुलिस चौकी के समीप मीट बाजार भी है। स्लाटर हाउस बंद होने के साथ ही वहां ताला पड़ा था वहीं मीट बाजार की दुकानाें के शटर सोमवार को गिरे नजर आए। वहीं हाजीपुरा, रामगढ़, कोहिनूर रोड, आकाशवाणी रोड पर भी मीट की दुकानें बंद थी।
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मीट विक्रेता मोहम्मद इस्तकार का कहना है कि निगम अधिकारी भले ही नए लोगों के लाइसेंस नहीं बनाए। लेकिन जिन लोगों के लाइसेंस पूर्व में बने हैं और वह नियम शर्तों को पूरा कर रहे हैं, कम से कम उन लोगों के लाइसेंस का तो नवीनीकरण कर दें। मोहल्ला कुरैशियान निवासी आजाद कुरैशी का कहना है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र में 175 मीट की दुकानें हैं। स्लाटर हाउस बंद होने से करीब एक लाख रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। मोहल्ला मोहम्मदगंज निवासी मोहम्मद शहजाद का कहना है स्लाटर हाउस बंद कराने के साथ ही कुछ दिनों का समय देना चाहिए था। इससे करोबार करते हुए कागजी कार्रवाई को पूरा कर लिया जाता। पुराना रसूलपुर निवासी मोहम्मद आरिफ का कहना है कि मीट का कारोबार बंद होने से मजदूरी करने के साथ ही परिवार का भरण पोषण करने वालों को ज्यादा परेशानी हो रही है।  

नहीं मिला न्याय तो परिवार सहित मुख्यालय पहुंचेंगे
डीएम नेहा शर्मा से मिलकर लौटे मीट कारोबारियों का कहना था कि यदि प्रशासन ने उनकी मदद करने के साथ ही लाइसेंस नहीं दिया तो वह परिवार के साथ जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए बाध्य होंगे। उनके पास इसके अलावा कोई दूसरा कारोबार भी नहंी है। ऐसे में काम बंद होेने से रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।
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