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किसानों के लिए आया 23 करोड़ जाएगा वापस

Mon, 27 Mar 2017 11:36 PM IST
राजकुमार/राकेश अग्रवाल/सत्येंद्र सिंह
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फाइल फोटो
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तहसील के अधिकारियों की लापरवाही अन्नदाता पर भारी पड़ी। ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को बांटने के लिए शासन ने तो विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 25 करोड़ रुपये आवंटित किए। हालांकि तहसीलों की टीमें दो करोड़ 16 लाख 28482 रुपये का ही वितरण कर सकी। अब शेष 23 करोड़ 27 लाख रुपये जिला प्रशासन शासन को वापस भेजने की तैयारी में है।
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जिले में 13 एवं 14 अप्रैल 2015 को बारिश के बाद प्रशासन ने सर्वे कराया था। प्रशासन के सर्वे में एक लाख पांच हजार 734 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी। 86307.149 हेक्टेयर में मतलब 33 प्रतिशत से अधिक हानि थी। सीधे तौर पर इतनी फसल का मुआवजा केंद्र और प्रदेश सरकारों को देना था। इसमें सर्वाधिक 90 हजार पांच हेक्टेयर गेहूं की फसल प्रभावित थी। 80946 हेक्टेयर गेहूं की 33 प्रतिशत से अधिक हानि थी। जिला प्रशासन ने एक अरब 59 करोड़ 16 लाख 90 हजार 188 रुपये की मांग की। प्रदेश सरकार ने कम से कम 1500 रुपये और प्रति हेक्टेयर 18 हजार रुपये तय किया। 13500 रुपये प्रति हेक्टेयर दर केंद्र सरकार को देने थे। ऐसे में जिले को एक अरब नौ करोड़ 13 लाख 82 हजार रुपया आवंटित हुआ। जिला प्रशासन की ओर से सितंबर 2016 में 35 करोड़ की मांग शासन से की थी। किसानों को मुआवजा बांटने के लिए 25 करोड़ रुपये अक्तूबर माह में आवंटित हुआ। इसके बावजूद तहसील प्रशासन ने दो करोड़ 16 लाख 28482 रुपया ही बांटा। प्रशासन सूत्रों की मानें तो 23 करोड़ 27 लाख से अधिक धनराशि शासन को वापस भेजनी पड़ेगी।

तहसीलों एवं लेखपालों के चक्कर काटते थके
किसानों को अफसरों ने नहीं दिया कोई ठोस जबाव
- जसराना क्षेत्र के सिकंदरपुर निवासी पूर्व फौजी मोहन लाल ने कहा उनके चार भाइयों की 50 बीघा जमीन पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। लेखपाल द्वारा फसल हानि का सिर्फ आंकलन किया गया था लेकिन अभी तक मुआवजा राशि नहीं मिली। जसराना के घाघऊ नगला पांडे निवासी लाखन सिंह ने कहा 14 बीघा फसल ओलावृष्टि के कारण बर्बाद हो गई थी। प्रशासन ने कोई मुआवजा नहीं दिया। तहसील के कई बार चक्कर भी लगाए लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। जसराना नगला रामा निवासी गौरव ने बताया उनके पिता और ताऊ की फसल बर्बाद होने के बाद अभी तक कोई मुआवजा ही नहीं दिया है। उन्हें अभी मुआवजा की दरकार है। नारखी के गांव जाखई निवासी रामवीर सिंह की 20 बीघा गेहूं की फसल ओलावृष्टि में बर्बाद हुई थी। मुआवजे के नाम पर अभी तक फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। लेखपाल ने सिर्फ सर्वे ही किया था। नारखी धौंकल के सुशील शर्मा की ओलावृष्टि में सात बीघा सरसों एवं आठ बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो गई थी। सुशील शर्मा ने मुआवजा के लिए लेखपाल से कई बार संपर्क किया। लेखपाल ने बजट आने की बात कहकर ही पल्ला झाड़ लिया।
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तहसील का नाम     डिमांड            मिला
फिरोजाबाद          3123.50       2485.32  लाख
शिकोहाबाद/सिरसा. 5339.58       3329.82 लाख
जसराना             4749.30       2628.66 लाख  
टूंडला               2704.52       2470.02 लाख
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कुल             15916.90       10913.82  लाख
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मुआवजा कम वितरण में नियमावली भी बनीं बाधक
फिरोजाबाद (ब्यूरो)। विधानसभा चुनाव करीब आने से पूर्व जिला प्र्रशासन ने 35 करोड़ मुआवजे की मांग शासन से की थी। चुनाव करीब देख 25 करोड़ रुपये आवंटित तो किया गया लेकिन शर्त लगा दी गई कि केंद्र से पैसा नहीं मिला तो कम से कम एक हजार रुपया किसानों को मुआवजा दिया जाए। पहले 18 हजार प्रति हेक्टेयर का मानक था। इस बदलाव के कारण भी तहसील की टीमों को दिक्कत हुई।

46 हजार से भी अधिक किसान होते लाभान्वित
फिरोजाबाद (ब्यूरो)। जिला प्रशासन की ओर से यदि प्रति किसान पांच हजार रुपये भी मुआवजा दिया गया होता तो 23.27 करोड़ धनराशि से जिले के 46 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होते। इतनी धनराशि से जिले के किसानों को काफी राहत मिलती।
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