रोगों से बचाव की नसीहत देने वाले स्वास्थ्य महकमे के आंगन में बीमारियों का डंक पल रहा है। मुख्य गेट से लेकर वार्डों के बाहर तक गंदा पानी भरा है। निकासी न होने के कारण पानी से दुर्गंध आती और उसमें मलेरिया फैलाने वाले मच्छर पनपते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि स्वास्थ्य विभाग को किस तरह से जागरूक किया जाए। यहां बर्न वार्ड के पीछे बने गंदे तालाब से मरीजों को हर पल खतरा रहता है। वहीं, अस्पताल के बाहर नाले का पानी अक्सर सड़कों पर नजर आने लगता है। ऐसे में कभी जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को मलेरिया का डंक चुभ सकता है। चिकित्सकों के अनुसार मलेरिया एक वाहक जनित संक्रामक रोग है, जो प्रोटोजोआ परजीवी से फैलता है। यह अधिकांश जून से सितंबर तक प्रभावी रहता है। फैल्सीफैरम प्रजाति द्वारा होने वाले मलेरिया से ज्यादा मौतें होती हैं। जिले के लिए यह रोग अनेकों बार खतरनाक बन चुका है।
देहात क्षेत्रों में कोई पुख्ता इंतजाम नहीं
हर साल देहात क्षेत्रों में मलेरिया फैलता है। इसे बावजूद स्वास्थ्य विभाग के पास इससे निपटने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। हर साल स्वास्थ्य विभाग बस इतना करता है कि मलेरिया फैलने पर टीमें भेज देता है। स्लाइड बनाई जाती हैं, लेकिन रिपोर्ट नही दी जाती।
मलेरिया रोग के लक्षण
मलेरिया में रुक-रुक कर बुखार आता है।
सिरदर्द, उल्टी भी मलेरिया का कारण हो सकती है।
गर्मी के दिनों में भी सर्दी का अहसास होना
रोगी का अचानक जलन और दर्द महसूस होने लगती है।
मलेरिया से ऐसे बचे
सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
घर के आसपास गड्ढे भर दें।
ज्यादा दिनों तक पानी को जमा न होने दें।
कूलर में पानी को सप्ताह में पूरा बदलें।
बरसात का पानी इकट्ठा ना होने दें।
पिछले वर्ष इतने मरीजों में पॉजिटिव मिला मलेरिया
वर्ष संख्या
2013 278
2014 135
2015 130
सरकारी जांच पर मरीजों को नहीं रहता भरोसा
सरकारी अस्पतालों में मलेरिया की जांच आज भी स्लाइड द्वारा की जाती है। इसमें मलेरिया का असर ज्यादा हो तभी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। मलेरिया की पहचान शुरुआती दौर में स्लाइड से नहीं हो पाती है। जिला अस्पताल की लैब हेड डॉ. नवीन जैन कहते हैं कि मरीज अब स्लाइड की रिपोर्ट पर भरोसा कम करते हैं।
रुक रुक, सर्दी के साथ बुखार आए तो मलेरिया की जांच करानी चाहिए। मलेरिया की रक्त जांच की सुविधा जिला अस्पताल के अलावा सभी सीएचसी, पीएचसी पर उपलब्ध हैं। यूं तो मलेरिया जुलाई में बढ़ता है, लेकिन कहीं भी मलेरिया के लक्षण हो तो स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराएं। टीम भेजकर कैंप लगवाए जाएंगे।
डॉ पुष्कर आनंद
मुख्य चिकित्साधिकारी
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मलेरिया जैसी बीमारियों के लिए सरकार लाखों रुपया देती है लेकिन स्थानीय स्तर पर चिकित्सक लापरवाही बरतते हैं। इसके लिए मानीटरिंग होनी चाहिए। मलेरिया के रोकथाम के लिए सफाई व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
पवन दीक्षित