मकर संक्रांति पर्व जिले में उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। मकर संक्रांति के दो दिवसीय त्योहार पर जगह-जगह खिचड़ी वितरण किया गया। घरों और मंदिरों में दान-पुण्य करने की होड़ रही। किसी ने गरीबों को खाना खिलाया, किसी ने कपड़े बांटे तो किसी ने गायों को चारा और गुड़-खींचड़ा खिलाया। वहीं गुरुवार को दिन भर मकानों की छतों पर ये काटा वो काटा का शोर रहा। मकर संक्रांति के दिन चूड़ा-दही और तिल कुट खाने की भी परंपरा है। इस दिन तिल दान किए गए।
यमुना तट पर शुक्रवार सुबह लोगों ने श्रद्धा की डुबकी लगाई। जरूरतमंदों को फल वितरण किए तो किसी ने कंबल तो कहीं वस्त्रों का दान किया। महिलाओं ने शृंगार की वस्तुएं बांटी और शहर के चौराहों पर स्टॉल लगाकर समाजसेवियों ने खिचड़ी का दान किया। मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना भी की गई।
ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा में डुबकी लगाने और गंगा तट पर तिल का दान करने से सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है। विद्वानों के मुताबिक, इसी दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और दक्षिणायण से उत्तरायण की ओर जाते हैं। पंडितों का कहना है कि सूर्य के धनु से मकर राशि में जाने से ‘खरमास’ भी समाप्त हो जाता है और शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। पंडित श्रीपति शास्त्री के मुताबिक, ‘जो लोग मकर संक्रांति की सुबह गंगा स्नान के बाद भगवान भास्कर को तिल का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं, उन पर भगवान भास्कर की कृपा बनी रहती है।’
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आकाश में छाई पतंगे
शुक्रवार को जिले भर में सुबह से ही आकाश में रंग-बिरंगी पतंगे उड़ने लगीं। युवा शाम को अंधेरा होने तक पतंग उड़ाने में तल्लीन नजर आए। लोगों ने मकानों की छतों पर ही डेक मशीनें लगा ली। पतंग उड़ाने के साथ ही युवा छतों पर फिल्मी गानों की धुनों पर झूम रहे थे। हालांकि कई बार हवा धीरे चलने से पतंग उड़ाने वालों में मायूसी छाई। गांधी तिराहे पर व्यापारियों ने राहगीरों को चाय पिलाई।