फिरोजाबाद। अपर जिला जज ग्यारह एवं विशेष जज दस्यु प्रभावित क्षेत्र रवींद्र कुमार ने 30 वर्ष पुराने गर्भवती महिला की हत्या व लूट के मामले में दोषी देवर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड में से 50-50 हजार की धनराशि मृतका की बेटियों को देने के आदेश दिए हैं। मामला थाना दक्षिण क्षेत्र का 6 अगस्त 1994 का है। थाना क्षेत्र के मोहल्ला करबला गली नंबर सात निवासी मिथलेश पुत्री रामसनेही राठौर अपने चाचा चंद्रप्रकाश के घर सोने गई थीं। घर पर उसकी मां सूरजमुखी बहन सर्वेश उम्र दो वर्ष के साथ अकेली सो रही थी। उसके पिताजी रुड़की चूड़ी के व्यापार के संबंध में 15 दिन पहले से गए थे। सात अगस्त की सुबह घर पहुंची तो देखा कि उसकी मां चारपाई पर मृत अवस्था में पड़ी थी। एक कमरे का कुंडा टूटा हुआ है, कनस्तर की दाल फैली थी। एक कनस्तर जिसमें चावल में 1700 रुपये रखे हुए गायब थे। मिथलेश की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
जांच के दौरान मृतका के भाई बलवीर सिंह राठौर द्वारा पुलिस को प्रार्थनापत्र देकर मृतका के देवर चंद्रप्रकाश व उसके साथियों के खिलाफ हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया। पुलिस ने जांच के बाद मृतका के देवर चंद्रप्रकाश निवासी करबला व मोहर सिंह उर्फ मुन्ना राठौर निवासी सुदामा नगर थाना उत्तर के विरुद्ध हत्या व लूट की धारा में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमा अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या ग्यारह, विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र रविंद्र कुमार की अदालत में चला। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी
विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र राठौर व ललित बघेल ने कहा इसमें सात गवाहों ने गवाही दी। गवाही एवं साक्ष्य के आधार पर चंद्रप्रकाश को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर एक लाख बीस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषी को एक वर्ष के कारावास की अतिरिक्त सजा भोगनी होगी। दोनों बेटियों को 50-50 हजार की धनराशि मिथलेश व सर्वेश देवी को दिए जाने के आदेश दिए हैं। साक्ष्य के अभाव में मोहर सिंह उर्फ मुन्ना राठौर को दोषमुक्त किया है।
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