फिरोजाबाद। साधन सहकारी समिति मटसैना में किसानों के नाम पर फर्जी ऋण दिखाकर धनराशि निकालने के मामले में जांच शुरू होते ही खलबली मच गई। जांच की आंच से खुद को बचाने के लिए पूर्व सचिव की ओर से किसान के नाम से निकाली गई रकम को बैंक में चुपचाप जमा कराने का खेल शुरू कर दिया गया है। हालांकि, विभागीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यदि जांच गहनता से की जाए तो कई अन्य किसानों के नाम पर हुए ऐसे फर्जीवाड़े की परतें भी खुल सकती हैं।
मटसैना समिति में नए सचिव की तैनाती के बाद जब किसानों को उनकी कृषि भूमि पर फर्जी तरीके से लोन निकाले जाने का पता चला, तो उनके होश उड़ गए। परेशान किसानों ने इस संबंध में एआर कोआपरेटिव (सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता) से शिकायत की और नए सचिव को भी पत्र सौंपा।
किसानों का कहना था कि जब उन्होंने कभी लोन लिया ही नहीं, तो उनके नाम और जमीन का दुरुपयोग क्यों किया गया। मामले की जांच जब एडीसीओ (सहायक विकास अधिकारी सहकारिता) ने शुरू की, तो तत्कालीन सचिव ने अपना बचाव का रास्ता खोजना शुरू कर दिया।