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Firozabad News: फ्लोराइड का दंश झेल चुके गांव में अब बच्चों में फ्लोरोसिस के लक्षण

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फोटो 30 मिलिक गांव निवासी दिव्यांग युवक। संवाद
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फिरोजाबाद। कभी दूषित और जहरीले पानी के कारण अपंगता और बदनामी का दंश झेलने वाला नारखी ब्लॉक का कायथा मिलिक गांव आज फिर एक गंभीर स्वास्थ्य संकट के मुहाने पर खड़ा है। वर्षों पहले जिस खारे और दूषित पानी को ग्रामीण अपनी सबसे बड़ी त्रासदी मानते थे, भूजल स्तर नीचे जाने के बाद पानी की रंगत में आंशिक सुधार तो आया, लेकिन पानी में घुले घातक रसायनों का दंश अब नई पीढ़ी को अपनी चपेट में ले रहा है। गांव के बच्चों में स्पष्ट रूप से डेंटल फ्लोरोसिस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, जबकि युवा और बुजुर्ग जोड़ों के असहनीय दर्द से लाचार हैं।
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गांव के जगदीश कुशवाहा ने बताया कि गांव में जन्म ले रहे नए बच्चों के दांतों पर पीलापन साफ झलक रहा है। कम उम्र में ही बच्चों के दांत कमजोर होकर झड़ने और खराब होने लगे हैं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, पेय जल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने पर ही बच्चों की हड्डियों और दांतों में फ्लोरोसिस की बीमारी पनपती है।
ओमवीर सिंह ने बताया कि 30 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग हर नागरिक में घुटनों, जोड़ों और एड़ियों के दर्द की गंभीर समस्या बनी हुई है। युवावस्था में ही ग्रामीण लाठी के सहारे चलने को मजबूर हो रहे हैं।
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30 साल पुराना काला इतिहास, शादियों तक से कतराते थे लोग
ग्रामीण बताते हैं कि करीब 20 से 30 वर्ष पहले गांव का भूजल इतना जहरीला था कि यहां जन्म लेने वाले कई बच्चे शारीरिक रूप से विकलांग पैदा होते थे। इस खौफ के कारण आसपास के क्षेत्रों के लोग अपनी बेटियों का रिश्ता इस गांव में करने से कतराते थे। हालांकि सबमर्सिबल लगने के बाद विकलांगता का वह भयानक दौर तो रुका, लेकिन फ्लोराइड का नया रूप अब दांतों और हड्डियों को खोखला कर रहा है।
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