फिरोजाबाद। जिले में मक्का की सरकारी खरीद की प्रगति शून्य रही। खुली मंडी में सरकारी समर्थन मूल्य से अधिक दाम मिलने के कारण किसानों ने खाद्य एवं विपणन विभाग द्वारा निर्धारित केंद्रों पर जाने की जहमत नहीं उठाई। हालांकि शासन ने जिले को 30 हजार क्विंटल मक्का खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया था। हालांकि जिले में एक किग्रा भी मक्का खरीद नहीं हो सकी।
खरीफ की प्रमुख फसल मक्का की खरीद के लिए 2020-21 में सभी मंडी परिषदों फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, सिरसागंज, टूंडला, जसराना, नारखी, मदनपुर एवं अरांव में कुल आठ केंद्र बनाए गए थे। 15 अक्तूबर को शुरू किए गए सभी क्रय केंद्रों पर मक्का की सरकारी खरीद के लिए 30 हजार क्विंटल का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। शासन ने मक्का की सरकारी खरीद के लिए 1870 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय किया था। हालांकि दो माह बाद 14 दिसंबर तक जिले में मक्के की एक किग्रा भी खरीद नहीं हो सकी।
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- वर्ष 2019-20 में 10 केंद्रों पर लगभग 60,000 क्विंटल की खरीद
- वर्ष 2020-21 में जिले में मक्का की पैदावार औसतन 68000 क्विंटल
- अरांव, जसराना, एका, मदनपुर और सिरसागंज मक्का फसल बहुल इलाके
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अधिकारी की बात-
इस वर्ष जिले में बनाए गए सरकारी क्रय केंद्रों पर मक्का खरीद की प्रगति शून्य रही। इसका प्रमुख कारण किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य की अपेक्षा खुले बाजार में पैसा अधिक मिलना है। इसके अलावा किसान भाइयों ने त्वरित भुगतान मिलने की आस में भी सरकारी क्रय केंद्रों की ओर रुख नहीं किया।
गोरखनाथ यादव जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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खुले बाजार में इस वर्ष मक्का की दरें प्रति क्विंटल लगभग 1850 रुपये लेकर 1950 रुपये तक रही। सरकारी क्रय केंद्रों पर पहले पंजीकरण कराने, फिर उपज की तौल व गुणवत्ता जांच जैसे काम पूरे कराने होते हैं। इसके बाद फसल बिकने पर अगले दो-तीन दिन तक पीएफएमएस के माध्यम से बैंक खाते में धनराशि हस्तांतरण का इंतजार करना पड़ता है। यही कारण रहा कि किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर मक्का की बिक्री क ेलिए नहीं पहुंचे।
अवनीश कुमार शर्मा आढ़तिया, मंडी परिषद फिरोजाबाद