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चूडी निर्माता इकाइयों ने उठाई एपीएम गैस कोटा सुनिश्चित कराने की मांग

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फिरोजाबाद ! औद्योगिक क्षेत्र स्थित चूड़ी कारखाने में काम करते श्रमिक - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। मंदी, कच्चे माल और गैस के दामों में बढ़ोत्तरी की समस्या से जूझ रहे कांच चूड़ी इकाई संचालकों ने केंद्र सरकार से पांच हजार घनमीटर तक गैस कोटा प्राप्त इकाइयों को सस्ती दर वाली एपीएम गैस कोटा सुनिश्चित कराने की मांग की। वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गैस कोटा प्राप्त करने वाली इन इकाई संचालकों के अनुसार बर्बादी के कगार पर खड़े सुहागनगरी के परंपरागत कांच चूड़ी उद्योग को बचाने के लिए सस्ती दर वाली गैस का कोटा सुरक्षित होना जरूरी है।
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फिरोजाबाद, मक्खनपुर, राजा का ताल आदि क्षेत्रों में कांच चूड़ी उत्पादन करने वाली करीब 90 इकाइयां संचालित हैं। वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ये इकाइयां सस्ती दर वाली एपीएम (एडमिनिस्ट्रेड प्राइसिंग मैकेनिज्म) श्रेणी की नेचुरल गैस से संचालित होती रही हैं। इन सभी इकाइयों को अब सस्ती दर वाली एपीएम वाणिज्य दर वाली आरएलएनजी (रैक्सिफाइड लिक्विड नेचुरल गैस) के अलावा स्पॉट आरएलएनजी (री-गैसीफाइड लिक्विड नेचुरल गैस) के अनुपातिक दर वाली मंहगी कीमत की गैस का भुगतान करना पड़ रहा है।
इसकी वर्तमान में कीमत 28.50 प्रति घनमीटर है। कांच चूड़ी निर्माता इकाई संचालकों का कहना है कि गैस कोटा निर्धारण के शुरुआती दौर में 5000 घनमीटर तक का गैस कोटा हासिल करने वाली इकाइयों को सस्ती दर लगभग 14 रुपये प्रति घनमीटर का सुरक्षित किया जाए अन्यथा की स्थिति में लगभग सौ साल पुराना सुहागनगरी का परंपरागत चूड़ी उद्योग बर्बाद हो जाएगा।
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लागत घटने से बढ़ी चूड़ी की डिमांड
चूड़ी उद्योग से जुड़े जानकारों की मानें तो सस्ती दर की एपीएम गैस का कोटा सुरक्षित होने की स्थिति में चूड़ी तैयार करने में लगने वाली लागत भी कम होगी। इसका सीधा असर फुटकर चूड़ी कारोबार पर पडे़गा। सादा व फैंसी चूड़ी की दर कम होने से महंगाई के दौर में डिमांड भी बढ़ेगी।
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अलग-अलग श्रेणी वाली नेचुरल गैस की वर्तमान दर-
एपीएम---------------- 14 रुपये प्रति घनमीटर लगभग
आरएलएनजी--------- 50-60 रुपये प्रति घनमीटर लगभग
स्पॉट आरएलएनजी--- 90-100 रुपये प्रति घनमीटर लगभग
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चूड़ी उद्योग से जिले के करीब छह लाख लोगों को आजीविका मुहैया होती है। कुटीर उद्योग की भांति सुहागनगरी में संचालित परंपरागत चूड़ी उद्योग मंदी की मार एवं सामाजिक परिवेश में हुए बदलाव के कारण संक्रमण की स्थिति में है। हाल ही में नेचुरल गैस व कच्चे माल की दरों में बढ़ोत्तरी से चूड़ी की लागत बढ़ गई है। सरकार पांच हजार घनमीटर तक कोटा हासिल करने वाली कांच चूड़ी इकाइयों को एपीएम श्रेणी की गैस का कोटा सुनिश्चित करे। इससे परंपरागत चूड़ी उद्योग को बचाया जा सकेगा।
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हनुमान प्रसाद गर्ग, चेयरमैन द ग्लास सिडिंकेट
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