फिरोजाबाद। चुनावी बिगुल बज गया है, आयोग ने तारीखों का एलान कर दिया। राजनीतिक सरगर्मियां काफी तेज हो गईं, लेकिन सपा को यदि छोड़ दें तो किसी भी राजनीतिक दल ने अभी प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं की है। सत्ताधारी दल भाजपा के साथ ही बसपा सहित अन्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को अपने दल के घोषित होने वाले प्रत्याशी का इंतजार है। देखना यह होगा कि यह पार्टियां किस चेहरे पर दांव लगाती हैं। यूं तो आम चुनाव की हर राजनैतिक दल तैयारी कर रहा था। पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के साथ चुनावी रणनीति बनाई जा रही है। समाजवादी पार्टी प्रत्याशी तय करने में इस बार अव्वल रही। पार्टी ने पूर्व सांसद अक्षय यादव को चुनाव मैदान में उतारा है। अक्षय यादव 2014 में यहां से सांसद चुने गए थे। 2019 का चुनाव वह मोदी लहर में हार गए थे। भाजपा के डाॅ. चंद्रसेन जादौन चुनाव जीतकर संसद भवन में पहुंचने का काम किया था।
समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर पूर्व सांसद अक्षय पर ही दांव लगाया है। सत्ताधारी दल भाजपा ने अभी तक उम्मीदवार घोषित नहीं किया। पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रत्याशी घोषित होेने का इंतजार है। पार्टी के जिम्मेदार का कहना है हमारा प्रत्याशी तो कमल निशान है। पार्टी जिसे उम्मीदवार बनाएगी उसे जिताने का काम करेंगे। बसपा सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गठबंधन के बजाय अलग होकर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। बसपा ने अपने स्तर से चुनाव की तैयारी की है।
बसपा किसी अल्पसंख्यक चेहरे पर दांव लगाने की तैयारी कर रही है, लेकिन प्रत्याशी कौन होगा इसकी घोषणा बसपा अभी तक नहीं कर पाई है। इसके अलावा छोटे दलों ने अभी तक प्रत्याशी तय नहीं किए हैं। हर चुनाव में जिले में सक्रिय रहने वाले एआईएमआईएम पर नजरें टिकी हुई हैं। यह दल किस पर दांव लगाएगा यह भविष्य के गर्त में छिपा है।
संगठन को ही उठाना पड़ रहा खर्चा जिन राजनैतिक दलों के प्रत्याशी घोषित नहीं हुए हैं उनको लोकसभा चुनाव संबंधी तैयारियों का खर्चा संगठन के जिम्मेदारों को उठाना पड़ रहा है। इसलिए उनको भी प्रत्याशी शीघ्र घोषित होने का इंतजार है।