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Firozabad News: मृत्यु पूर्व बयान ने दिलाई आजीवन कारावास की सजा

Wed, 18 Dec 2024 11:43 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
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फिरोजाबाद। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम अतुल चौधरी ने पांच वर्ष पूर्व विवाहिता की हत्या के मामले में देवर को आजीवन कारावास एवं 60 हजार रुपये अर्थदंड तथा ससुर को दहेज उत्पीड़न का दोषी पाते हुए तीन वर्ष का कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। जबकि पति को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया। विवाहिता की मृत्यु पूर्व बयान देवर एवं ससुर को दोषी ठहराने का पुख्ता साक्ष्य साबित हुआ। मामला थाना नसीरपुर क्षेत्र का है। वादिया सरोज देवी ने अपनी पुत्री रीना की शादी सोनू पुत्र रामवीर के साथ की थी, लेकिन शादी के बाद से 50 हजार रुपये नकद की अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उसके ससुरालीजन तंग परेशान करते थे। रीना अपनी ससुराल में थी तब 14 अक्तूबर 2019 को रीना को अतिरिक्त दहेज की खातिर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया गया। रीना के उपचार के दौरान 10 दिन बाद मौत हो गई। विवाहिता की मौत से पूर्व हुए बयान में उसने अपने देवर द्वारा केरोसिन का तेल डालने और ससुर द्वारा परेशान करना बताया था। पुलिस ने विवेचना उपरांत आरोप पत्र विवाहिता रीना के पति सोनू, ससुर रामवीर एवं देवर हीरालाल के विरुद्ध दाखिल किया। मुकदमा सेशन सुपुर्द होकर वास्ते सुनवाई एवं निस्तारण अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या प्रथम की न्यायालय भेजा गया।
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न्यायालय ने अभियुक्तों पर आरोप लगाया, इन्कार करते हुए सत्र परीक्षण की मांग की। न्यायालय में तमाम गवाहों ने गवाही दी और गवाह घटना से मुकर गए। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने उच्च एवं उच्चतम न्यायालय की तमाम नजीर पेश करते हुए विवाहिता के मृत्यु पूर्व बयानों की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित करते हुए अधिक से अधिक सजा दिए जाने की याचना की। न्यायाधीश अतुल चौधरी ने दोनों पक्ष के तर्क सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध तमाम साक्ष्य एवं मृतका का मृत्यु पूर्व बयानों का गहनता से अध्ययन करने के बाद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कहा जाता है कि विवाह की जोड़ी ईश्वर द्वारा बनाई जाती है, लेकिन समाज में फैली बुराइयों के कारण विवाह जैसे पवित्र बंधन को विघटन की ओर इंसान ले जाते हैं। न्यायाधीश अतुल चौधरी ने देवर हीरालाल को दहेज उत्पीड़न एवं हत्या करने तथा ससुर को दहेज उत्पीड़न का दोषी पाते हुए खुले न्यायालय में सजा सुनाई। जबकि पति सोनू को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया।
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