प्रशासनिक न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से छोटे-छोटे वादों का निस्तारण आसानी से हो जाता है। पहले गांव में पंचायतों के माध्यम से विवाद हल हुआ करते थे। अगर देश को समृद्ध बनाना है तो पंचायती व्यवस्था का ही महत्वपूर्ण योगदान होगा। उन्होंने हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी भाषाएं मौसी हैं और हिंदी माता है।
उन्होंने कहा कि मौसियों का भी सम्मान बना रहे, लेकिन मां का सिर न झुके। अंग्रेजी एवं अन्य भाषाओं को जानें, लेकिन हिंदी को भुलाएं नहीं। प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने 15 परिवारों के विवाद को निपटाकर एक साथ भेजे जाने की सराहना की। दंपती को फूल माला पहनाई गईं। जिला जज हरवीर सिंह ने प्रशासनिक न्यायमूर्ति का आभार व्यक्त किया।
अपर जिला जज एवं प्राधिकरण सचिव पीयूष सिद्धार्थ ने कहा कि हिंदी दिवस पर उच्च न्यायायालय ने 21 हजार से अधिक वादों का निस्तारण हिंदी भाषा में किया है। जो अपने आप में रिकार्ड है। प्राधिकरण सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में एक लाख 35195 वाद निस्तारण करके 24.95 करोड़ से अधिक अर्थदंड व समझौता राशि वसूल की। जनपद न्यायालय ने 31087 वाद, परिवार न्यायालय ने 114 वाद, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण 13 वाद निस्तारित कर 83.29 लाख समझौता राशि वसूली गई।
राजस्व न्यायालय ने 38221 वाद, बैंक के द्वारा वसूली योग्य 1449 वाद निस्तारित कर 20.90 करोड़ की धनराशि का सेंटलमेंट किया गया। अन्य विभागों द्वारा 64438 वाद निस्तारित कराए। संचालन अपर जिला जज सर्वेश कुमार पांडेय ने किया। इस दौरान प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय अरविंद कुमार सिंह द्वितीय, डीएम रमेश रंजन, एसएसपी सौरभ दीक्षित, सीएमओ डाॅ. रामबदन राम, जेल अधीक्षक एके सिंह, एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद आदि मौजूद थे।