जिले में विकास की रफ्तार तेज है लेकिन अधिकारियों की मनमानी शासन की मंशा को पलीता लगा रही है। सीएम की प्राथमिकता की योजनाओं को दरकिनार करके विभागों के मुखिया मनमर्जी कर रहे हैं। जिन अफसरों पर धनराशि को सही ढंग से खर्च करने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने बेतरतीब खर्चे शुरू कर दिए। शिकायत मिली और डीएम ने जांच कराई तो हकीकत भी परत दर परत खुलने लगी। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में सैकड़ों कार्य बिना टेंडर के ही करा डाले। धनाभाव का रोना रोने वाले जल निगम के बैंक एकाउंट खंगाले तो करोड़ों का खजाना मिला। संयुक्त चिकित्सालय शिकोहाबाद में रोगी कल्याण समिति की धनराशि खर्च करने में मनमानी की गई।
नियमों को धता, जलनिगम के खातों में करोड़ों का बजट
धनाभाव का रोना रोने वाले जलनिगम की टीटीएसपी की जांच के दौरान अभिलेखों को खंगाला तो विभाग करोड़पति निकला। जलनिगम के विभिन्न बैंकों में संचालित करीब 18 बैंक एकाउंट में करीब 16 करोड़ की धनराशि निकली है। इतना बजट देखकर अधिकारी चौंक गए। वह पुरानी टीटीएसपी की जांच को भूलकर अब नई जांच की तैयारी में है।
जलनिगम द्वारा जिले में 753 टीटीएसपी स्थापित करने में करोड़ों रुपया खर्च किया था। तत्कालीन सीडीओ हीरा लाल ने इनका सत्यापन कराया तो गांव में टीटीएसपी ही नहीं मिली। इस जांच को वर्तमान सीडीओ सुजीत कुमार के द्वारा जारी रखा गया। डीएम विजय किरन आनंद ने उस दौरान तैनात रहे अफसरों को नोटिस भेजा। जवाब के लिए मौका दिया। ठेकेदारों पर शिकंजा कसा तो फिर वह टीटीएसपी लगाने पर सहमत हुए। टीटीएसपी स्थापित भी कर दीं। कुछ ठेकेदार इन्हें स्थापित करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। उनकी गर्दन फंसना तय है। जांच टीम इसे पूर्ण कर पाती इससे पहले ही जलनिगम के बैंक एकाउंटों में करीब 16 करोड़ का खजाना मिल गया। सवाल यह है वित्त विभाग के आदेश हैं कोई विभाग अपने पास धनराशि नहीं रख सकता है। इसके बावजूद आखिर विभाग इतनी अधिक धनराशि अपने पास कैसे रखे हुए है। हालांकि जांच में शामिल अफसरों के पास बैंकों के एकाउंट के साथ उसमें जमा धनराशि की डिटेल जलनिगम ने सौंप दी है। अफसरों ने इसकी जांच की तो जिले में पूर्व में तैनात कई अफसरों की गर्दन फंस सकती है।
बिना टेंडर जारी किए पीडब्लूडी ने करा दिए 350 कार्य
डीएम को 25 करोड़ के कार्य बिना टेंडर के कराए जाने की मिली थी शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
फीरोजाबाद। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड में धनराशि को खर्च करने में मनमानी की गई। सीडीओ की अध्यक्षता वाली समिति ने पिछले तीन वर्षों के अभिलेखों को जैसे खंगालना शुरू किया तो बिना टेंडर के एक दो नहीं बल्कि दो वर्षों में करीब 350 से अधिक काम कराए गए। अभी तो यह दो वर्ष का खाका और एक लाख से कम काम की रिपोर्ट आई है। जांच टीम अभिलेखों को खंगालने में जुटी है।
डीएम विजय किरन आनंद को शिकायत मिली थी कि पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में 25 करोड़ के विकास कार्य तो बिना टेंडर के ही कराए गए। डीएम ने सीडीओ सुजीत कुमार की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की। टीम में आरईएस के एई मोहम्मद शमीम व डीआरडीए के जेई व वरिष्ठ कोषाधिकारी पुष्पराज को शामिल किया है। जांच टीम ने 20 हजार से अधिक और एक लाख तक के कार्य 2012-13 से 2014-15 तक के मध्य कितने कराए गए इसकी रिपोर्ट मांगी। 2012-13 में ही विभाग ने 180 कार्य एक लाख से कम के करा डाले। इनमें अधिकांश 90 हजार से लेकर 99 हजार तक के ही हैं। 2013-14 में यह संख्या करीब 170 हो गई। दो वर्षों में करीब साढ़े तीन करोड़ के करीब धनराशि को बिना टेंडर सिर्फ गड्ढों में भरने पर खर्च कर दी। हालांकि टीम ने गुरुवार को पीडब्ल्यूडी विभाग में दस्तक दी। टीम एक लाख से अधिक के कार्यों की सूची खंगाल रही है। ताकि 25 करोड़ के कार्य बिना टेंडर के कराने की पुष्टि हो सके।
रोगी कल्याण समिति का बजट खर्च करने में मनमानी
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। संयुक्त चिकित्सालय शिकोहाबाद में घपले की शिकायत पर डीएम विजय किरन आनंद ने सीडीओ सुजीत कुमार की अध्यक्षता में टीम गठित की। टीम ने अभिलेखों को खंगाला तो जेएसवाई (जननी सुरक्षा योजना) को मिले करीब 68 लाख रुपये के काम में गड़बड़ी मिली। रोगी कल्याण समिति को मिली आठ लाख धनराशि खर्च करने में भी मनमर्जी की गई। सूत्रों की मानें तो तीन टेंडर के बजाय तीन काम अलग-अलग कुटेशन के माध्यम से कराए गए। अब इनके अभिलेख जांचे जा रहे हैं। बुधवार को वरिष्ठ कोषाधिकारी पुष्पराज एवं एनआरएचएम के लेखाधिकारी समेत टीम ने संयुक्त रुप से चिकित्सालय का निरीक्षण किया।