सुहागनगरी के कांच उद्योगों की चमक विदेशों तक पहुंचाने को डेनमार्क के एक डेलीगेशन ने गुरुवार को कई इकाइयों का निरीक्षण कर चूड़ी व ग्लास आइटमों की निर्माण प्रक्रिया देखी। उन्होंने कांच इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों से जानकारी ली।
सुहागनगरी में गुरुवार को डेनमार्क, स्वीडन, इंग्लैंड, जर्मनी, अमेरिका, इटली के डेलीगेशन ने दस्तक दी। इस डेलीगेशन में महिला-पुरुष सहित 33 सदस्य शामिल थे। डेलीगेशन के सदस्य टारबिन ने बताया है कि कांच उद्योग से जुड़े चुनिंदा उद्यमी, मैन्यूफेक्चरर्स व कलाकार शामिल हैं। कई सदस्य कांच आइटमों का उत्पादन करते हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया के प्रमुख देशों की स्वीकृति पर एक ऐसा डेलीगेशन बनाया गया है, जिसको हिंदुस्तान व फीरोजाबाद के कांच उद्योग पर विशेष रूप से रिसर्च करने की जिम्मेदारी सौंपी है। कांच उद्योगों में किस तरह से ग्लास वेयर, डेकोरेशन व चूड़ी का उत्पादन किया जाता है। डेलीगेशन के सदस्यों ने स्टेशन रोड स्थित राघव ग्लास, ओम ग्लास, मिलेनियम ग्लास का निरीक्षण किया। डेलीगेशन के सदस्यों ने कांच इकाई में हो रही चूड़ी के निर्माण के संबंध में कार्यरत श्रमिकों से जानकारी हासिल की। शुक्रवार को जीके ग्लास का निरीक्षण किया जाएगा।
1992 सालों से लगातार कर रहे हैं सर्वे
डेनमार्क के येंग कॉक ने बताया कि 1992 वर्षों से लगातार हिंदुस्तान में आकर कांच आइटमों को लेकर सर्वे कर रहे हैं। उद्यमी अशोक चतुर्वेदी से कांच उद्योग के बारे में विशेष जानकारी मिली है।
सर्वे के आधार पर अमेरिका में छप रही विशेष किताब
राघव ग्लास के स्वामी अतुल चतुर्वेदी ने बताया कि उद्यमी, डेनमार्क के डेलीगेशन द्वारा हिंदुस्तान के साथ फीरोजाबाद के कांच उद्योग पर रिसर्च की जा रही है। उस रिसर्च के आधार पर अमेरिका में एक विशेष पुस्तक का प्रकाशन होने जा रहा है। इस पुस्तक के प्रकाशन के जरिए कांच उद्योग की जानकारी कई देशों तक पहुंचेगी, जिससे फीरोजाबाद के कांच उद्योग की प्रसिद्ध भी विदेशों में बढ़ेगी।