कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल का काम काफी धीमी गति से चल रहा है। वित्तीय वर्ष 2014-15 के बजट को कार्यदायी संस्था खर्च नहीं कर सकी है। इसके कारण सभी कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल होना काफी मुश्किल दिखाई दे रहा है।
कब्रिस्तानों की भूमि पर कब्जा व आए दिन होने वाले विवादों को देख मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सभी कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल कराने का निर्णय लिया था। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को धनराशि जारी की गई थी। अफसरों ने बाउंड्रीवाल कराने की जिम्मेदारी जल निगम की सीएनडीएस शाखा को सौंपी थी। वित्तीय वर्ष 2012-13 में जिले को 179.25 लाख रुपये जारी किया था। विभाग इस धनराशि को 2013-14 तक में खर्च नहीं कर सका। काम की गति काफी धीमी होने के बाद भी शासन ने वर्ष 2013-14 में विभाग को 269.97 लाख रुपये जारी किया था लेकिन कार्यदायी संस्था की गति इस बार भी धीमी रही। यही कारण रहा कि शासन ने वित्तीय वर्ष 2014-15 में धनराशि को घटाकर 179.25 लाख कर दिया। 2014-15 के समाप्त होने पर यह धनराशि कहीं वापस नहीं चली जाए इसके कारण इसको पीएलए खाते में डाल दिया। गत वर्ष 28 कब्रिस्तानों को बाउंड्रीवाल के लिए चयन किया था। इनमें आधा दर्जन का निर्माण अभी तक पूर्ण नहीं हो सका। नए वित्तीय वर्ष में 27 का चयन किया है। इस संबंध में अल्प संख्यक कल्याण अधिकारी महेंद्रनाथ प्रताप ने कहा कि कब्रिस्तानों का निर्माण शीघ्र पूर्ण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यदायी संस्था के कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र देने पर ही नई किश्त जारी की जाएगी।