फिरोजाबाद। प्रदेश सरकार द्वारा आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की घोषणाएं फिलहाल जिले में कारगर साबित नहीं हो पा रही हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी है। अधिकांश चिकित्सालय किराये के अथवा जीर्ण-शीर्ण भवनों में संचालित हो रहे हैं।
जिले में कुल 26 आयुर्वेदिक एवं दो यूनानी चिकित्सालय हैं। जिले में कुल 11 आयुर्वेदिक चिकित्सकों की तैनाती के कारण ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में संचालित चिकित्सालय चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं।
वहीं शासन द्वारा जरूरी प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान नहीं करने के कारण संसाधनों की कमी भी चिकित्सालयों में है। खासतौर पर जांच संबंधी उपकरण उपलब्ध नहीं होने के कारण आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। जिला अस्पताल सहित महावीर नगर में जहां जिला स्तरीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हैं वहीं शिकोहाबाद स्थित करहरा, सिरसागंज, पैगू, गढ़सान, मुहम्मदपुर, धनुपुरा, जौधरी एवं बछगांव आदि में आयुर्वेदिक चिकित्सालय संचालित हैं।
- आयुर्वेदिक अस्पताल में चिकित्सकों की कमीं है। बजट भी धीरे-धीरे आता है। अगर थोड़ा ध्यान दिया जाए तो आयुर्वेदिक चिकित्सा फिर आगे बढ़ सकती है। जहां चिकित्सक तैनात हैं, वहां 70 से 80 मरीजों की ओपीडी रहती है।
डा. वीरेंद्र राजपूत, राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अध िकारी
-सरकार आयुर्वेदिक चिकित्सा पर विशेष ध्यान दे तभी कुछ बात बन सकती है। सरकार ने कई जड़ी-बूटियों पर भी रोक लगा दी है। आयुर्वेदिक कॉलेज की कमी भी आयुर्वेद चिकित्सा की तरक्की में बाधा है।
डा. हरीश दीक्षित, वैद्य
आयुर्वेदिक अस्पताल, महावीर नगर
जैन मंदिर में वर्षों से दी जा रही नि:शुल्क चिकित्सा
कई गंभीर रोगों में आयुर्वेद चिकित्सा आज भी कारगर है। आयुर्वेद चिकित्सा के नि:शुल्क औषधालय भी संचालित हैं। शहर के प्रमुख रत्नत्रय नसियाजी जैन मंदिर में जैन मुनि अमित सागर के आर्शीवाद से वैद्य राजेश जैन सरल द्वारा कई वर्षों से नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है। सप्ताह में प्रत्येक गुरुवार को वह मंदिर परिसर में बने औषधालय में मरीजों का इलाज करते हैं। दवा भी नि:शुल्क दी जाती है।