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रोहिणी नक्षत्र-अमृत योग बढ़ाएगा पति-पत्नी का प्रेम

Tue, 27 Oct 2015 11:37 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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फीरोजाबाद। 30 अक्तूबर को अखंड सुहाग की कामना का व्रत करवाचौथ है। इस बार शु्क्रवार और रोहिणी नक्षत्र में करवाचौथ है। इस विशेष संयोग में व्रत रखने वाली सुहागिनों का सुहाग तो अटल रहेगा ही, पति का आकर्षण भी उनके प्रति बढ़ जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी रोहिणी नक्षत्र में शाम 4:57 पर हुआ था। रोहिणी नक्षत्र होने के कारण पति-पत्नी के संबंधों में मिठास घुलेगी वहीं एक दूसरे के प्रति लगाव बढ़ जाएगा।
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इस बार करवा चौथ में अमृत सिद्ध योग भी पड़ रहा है। उस दिन चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र एवं वृष राशि में गोचर करेगा। इसका तात्पर्य है कि इस बार करवा चौथ में स्त्रियां चंद्रमा की शीतल ऊर्जा का अधिक से अधिक लाभ  प्राप्त कर सकती है। इस दिन विवाहिताएं तो अपने पति की दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की कामना करेंगी ही अपितु कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर व्रत को पूरा कर सकती हैं। इस व्रत में रात में शिव,  पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश और चंद्रमा के तस्वीरों और सुहाग की वस्तुओं की पूजा का विधान है। इस दिन निर्जला व्रत रखकर चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य अर्पण कर भोजन ग्रहण करना चाहिए।

कुछ ऐसे विशेष संयोग में आया करवाचौथ व्रत
-  30 अक्तूबर दिन शुक्रवार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि सुबह 8:25 तक रहेगी।
- सुबह 8:25 के बाद चतुर्थी तिथि लगेगी, जो सुबह 5:26 मिनट तक रहेगी।
- रोहिणी नक्षत्र शाम 4:57 मिनट तक है।
- चंद्रमा वृषभ राशि में सुबह 4:21 तक रहेगा।
- 30 अक्तूबर को चतुर्थी तिथि का क्षय भी हो रहा है।
- करवाचौथ पूजन का समय शाम 6:02 से शाम 07:18 तक है।

कब, कहां निकलेगा चांद?
 - सबसे पहले वाराणसी में रात 8 बजकर 8 मिनट पर चंद्रमा निकलेगा।
 - सबसे बाद में महाराष्ट्र के मुंबई में रात 8 बजकर 58 मिनट पर चांद का दीदार होगा।
-  फीरोजाबाद में चंद्रमा रात 8 बजकर 21 मिनट पर चांद का दीदार होगा।

चंद्रोदय होने का शुभ समय
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस बार करवा चौथ 30 अक्तूबर को है। करवाचौथ के बारे में पूर्ण निवारण वामन पुराण में दिया गया है। इस साल करवा चौथ में पूजा का समय शाम 6:02 से शाम 07:18 तक है। इस शुभ मुहूर्त में पूजा करने से अच्छा फल मिलेगा। साथ ही  चंद्रोदय का समय रात 8: 21 मिनट है। इस समय पर आप चांद को अर्घ्य देकर व्रत का पारण कर सकते है।
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करवा चौथ का महत्व
इस त्योहार को मनाने के पीछे महिलाओं का अपने पति के प्रति प्रेम, पारिवारिक सुख-समृद्धि एवं सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ-साथ भारतीय नारियों के त्यागमय जीवन के दर्शन होते हैं। इस पर्व में महिलाएं सोलह शृंगार करती  है। माना जाता है कि यह शृंगार प्रकृति का शृंगार होता है। इसलिए यह व्रत वैवाहिक स्त्री के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।


ऐसे करें करवा चौथ में पूजा
सबसे पहले सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत रखने का संकल्प लें और सास द्वारा भेजी गई सरगी खाएं। करवाचौथ का निर्जल व्रत होता है। मां  पार्वती, महादेव शिव और गणेश जी का ध्यान पूरे दिन अपने मन में करें। इसके बाद दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इस चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है, जो कि बड़ी पुरानी परंपरा है। अब आठ पूरियों की अठावरी बनाएं।  करवा चौथ की पूजा करने के लिए बालू या सफेद मिट्टी की एक वेदी बनाकर  भगवान शिव- देवी पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, चंद्रमा एवं गणेशजी को स्थापित  कर उनकी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। मां गौरी की गोद में गणेश जी का  स्वरूप बिठाएं। इन स्वरूपों की पूजा संध्याकाल के समय पूजा करने के काम आती है। माता गौरी को लकड़ी के सिंहासन पर विराजें और उन्हें लाल रंग की चुनरी पहना कर अन्य सुहाग, शृंगार की चीजें अर्पित करें। उनके सामने जल से भरा कलश रखें। गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें। रोली से करवे पर स्वास्तिक बनाएं। गौरी गणेश के
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स्वरूपों की पूजा करते हुए इस मंत्र का जाप करें-
ऊं नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।।
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