फीरोजाबाद। शासन द्वारा फीरोजाबाद नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा दिए करीब दो माह पूरे होने जा रहे हैं। लेकिन निगम बनने के बाद सभी योजनाओं पर ब्रेक लगा हुआ है। चाहे वह अफसरों की तैनाती हो, नगर निगम के नवीन भवन का मामला हो या फिर विकास कार्यों का। सभी मामले शासन-प्रशासन में अटके हैं।
शासन द्वारा चार अगस्त को सुहागनगरी को नगर पालिका से नगर निगम का दर्जा देने की घोषणा की गई। आठ अगस्त को बोर्ड भंग करते हुए प्रशासक के रूप में डीएम की तैनाती कर दी गई, ताकि आगामी योजनाओं पर तेजी से कार्य हो सके। तेजतर्रार डीएम विजय किरन आनंद द्वारा इसका खाका भी खींचा, लेकिन इस कवायद का असर धरातल पर नजर नहीं आ रहा। नगर निगम की घोषणा के बाद 11 अगस्त को प्रमुख सचिव श्रीप्रकाश सिंह ने मंडलायुक्त, डीएम को पत्र भेजकर नगरायुक्त, अपर नगर आयुक्त सहित अन्य अफसरों की तैनाती के संबंध में प्रस्ताव मांगा था। नगर निगम द्वारा भेजे प्रस्ताव पर वित्त विभाग ने आपत्ति जताते हुए सेंट्रलाइज के पद घटाकर पुन: प्रस्ताव मांगा। इस पर नगर निगम द्वारा दोबारा प्रस्ताव भेज दिया गया। लेकिन आज तक किसी अधिकारी की तैनाती के आदेश नहीं हुए।
डीएम द्वारा नगर निगम की पुरानी बिल्डिंग को निष्प्रोज्य घोषित कर नई बिल्डिंग बनाने के निर्देश लोक निर्माण विभाग को दिए। प्रस्ताव बनना तो दूर नए भवन के लिए स्थल चयन की प्रक्रिया भी पूर्ण नहीं हो सकी। वहीं विकास कार्यों, पेयजल व्यवस्था के लिए बनाए गए प्रस्ताव भी जिला प्रशासन स्तर पर लंबित हैं।
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जनता को राहत मिलने के नहीं दिख रहे आसार
सुहागनगरी को नगर निगम बने भले दो माह हो रहे हैं, परंतु अधिकांश फाइलें लंबित होने के कारण जनता को कोई बड़ी राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। शासन, प्रशासन स्तर पर अफसरों की तैनाती से लेकर विकास कार्यों को हरी झंडी न दिए जाने से मामला जहां का तहां अटका है।
नगर निगम बनने के बाद प्रस्तावों का हाल-
- 11 अगस्त को प्रमुख सचिव द्वारा अफसरों की तैनाती को प्रस्ताव मांगा गया
- नगर निगम द्वारा भेजा गया प्रस्ताव वित्त विभाग में लंबित
- डीएम ने पुरानी बिल्डिंग को निष्प्रयोज्य कर नए बिल्डिंग का नक्शा बनाने के निर्देश दिए
- नए बिल्डिंग का नक्शा बनना तो दूर अभी तक स्थल चयन की प्रक्रिया भी पूर्ण नहीं हो सकी
- विकास कार्यों के लिए 22.61 करोड़ के प्रस्ताव, जो पीडब्लूडी विभाग में लंबित
- ड्रेनेज सिस्टम के लिए 5.72 करोड़ के प्रस्ताव जलनिगम में लंबित
- पेयजल व्यवस्था को 12.6 करोड़ के प्रस्ताव जिला प्रशासन स्तर पर लंबित
- शहर में अधूरे पड़े 150 से अधिक निर्माण कार्य अभी तक चालू नहीं हो सके
- मुख्यमंत्री द्वारा खत्ताघर के संबंध में हुई कार्यवाही के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई
निगम बनते ही जलापूर्ति व्यवस्था डगमाई
नगर निगम बनने के बाद उम्मीद थी कि जलापूर्ति व्यवस्था सुधरेगी लेकिन हुआ उल्टा व्यवस्था और वह डगमगा गई है। जलकल संस्थान कर्मचारियों की मनमानी के चलते डीप बोर नलकूपों से जलापूर्ति सुचारू नहीं है। दरअसल, जब बोर्ड था तब वार्ड सभासद जलापूर्ति को लेकर दवाब बनाए रहते थे।