फिरोजाबाद। जिले में स्वाइन फ्लू (एच1 एन1) का पहला मामला सामने आया है। जयपुर में इलाज के दौरान स्वाइन फ्लू संक्रमित पाए गए मोहल्ला गंज निवासी 69 वर्षीय व्यापारी की हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें रविवार रात फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने गंभीर हालत को देखते हुए मरीज को तत्काल स्वाइन फ्लू आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया है।
शहर के मोहल्ला गंज निवासी 69 वर्षीय व्यापारी पिछले कई दिनों से जयपुर स्थित दुर्लभजी अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे। वह पहले से ही गुर्दे (किडनी) और उच्च रक्तचाप (बीपी) की बीमारी से ग्रस्त हैं। उपचार के दौरान बीते 26 अगस्त को आई जांच रिपोर्ट में उनमें स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई थी। जयपुर में हालत में सुधार न होने और स्थिति गंभीर बने रहने पर वहां के चिकित्सकों ने परिजन को उन्हें घर ले जाने की सलाह दी थी।
जयपुर से रवाना होकर परिजन रविवार रात करीब 9 बजे व्यापारी को लेकर फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज पहुंचे। आपातकालीन विभाग में प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें सीधे मेडिकल कॉलेज परिसर में बनाए गए विशेष स्वाइन फ्लू आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया।
संपर्क में आए लोगों की स्क्रीनिंग शुरू
जिले में स्वाइन फ्लू का पहला मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। मरीज के परिवार और संपर्क में आए लोगों की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने परिजन व आसपास के लोगों को सावधानी बरतने तथा किसी भी प्रकार के लक्षण जैसे तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह लेने के निर्देश दिए हैं।
एक मरीज को स्वाइन फ्लू आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। उनका इलाज पूर्व में जयपुर में चल रहा था और वहीं जांच के दौरान स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। मरीज को विशेषज्ञों की देखरेख में रखा गया है।
- डॉ. योगेश गोयल, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
स्वाइन फ्लू के लक्षण
तेज बुखार: बहुत तेज बुखार आना और साथ में कंपकंपी (ठंड) लगना।
सांस संबंधी समस्याएं: लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ होना।
शारीरिक दर्द: सिरदर्द, मांसपेशियों में तेज दर्द और अत्यधिक थकान महसूस होना।
पाचन संबंधी समस्याएं: कुछ मामलों में उल्टी, दस्त (डायरिया) और पेट दर्द की शिकायत होना।
नाक से जुड़ी समस्याएं: नाक बहना या नाक बंद होना।
बचाव के उपाय
हाथों की स्वच्छता: हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं या अल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइजर का उपयोग करें।
मास्क का प्रयोग: भीड़भाड़ वाले इलाकों या अस्पताल जाने पर एन-95 या सर्जिकल मास्क पहनें।
दूरी बनाएं: संक्रमित या बीमार व्यक्तियों से कम से कम 1 से 2 मीटर की सुरक्षित दूरी बनाकर रखें।
खांसते-छींकते समय सावधानी: छींकते या खांसते समय अपने मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकें।
चेहरे को न छुएं: अपनी आंख, नाक और मुंह को बिना हाथ धोए छूने से बचें।
टीकाकरण: डॉक्टरी सलाह पर प्रतिवर्ष इन्फ्लूएंजा (स्वाइन फ्लू) की वैक्सीन लगवाएं।
प्रतिरोधक क्षमता: पौष्टिक आहार लें, पर्याप्त पानी पिएं और पूरी नींद लें।