एटा। मारहरा ब्लॉक का गांव हीरापुर में कई पीढि़या पक्की सड़क नहीं देख सकीं। आजादी के बाद से अब तक यहां कच्चे और खडंजा वाले मार्ग पर ही लोग चले हैं। लोगों को मलाल है कि कहां तो हाईवे, एक्सप्रेसवे की बातें हो रही हैं तो यहां उनका गांव पक्की सड़क के लिए तरस रहा है।
ग्राम पंचायत सींय के गांव हीरापुर के निवासियों को आज भी कच्चे रास्तों और टूटे हुए ईंट के खड़ंजे से होकर गुजरना पड़ता है। बारिश के मौसम में समस्या और भी विकराल हो जाती है। कीचड़ और जलभराव से रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध हो जाते हैं। गांव के लिए दो रास्ते हैं, इनमें एक पूरी तरह से कच्चा है, जबकि दूसरे पर ईंट का खड़ंजा किया गया है। जो जगह-जगह टूटा होने से लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। कच्चा मार्ग वर्षा के दिनों में कीचड़ से भर जाता है। जिससे गांव के लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है। खासतौर से बीमार और बुजुर्ग लोगों के लिए इन रास्तों पर सफर करना अत्यधिक कठिन हो जाता है।