पैमेश्वर गेट स्थित एक परिसर में चलते पांच प्राइमरी स्कूल।
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फिरोजाबाद। सरकार प्राइमरी स्कूलों को कॉन्वेंट की तर्ज पर संचालित करने के लिए प्रयासरत है। शिक्षा के नाम पर भरपूर बजट खर्च किया जा रहा है। लेकिन अफसरों की लापरवाही से कई प्राइमरी स्कूल सिर्फ कागजों में ही संचालित किए जा रहे हैं। इन स्कूलों के पास खुद का भवन नहीं है। शहरी क्षेत्र में आठ भवनों में 22 प्राइमरी स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। इन स्कूलों के लिए अलग-अलग बजट आवंटित होता है। शिक्षक या शिक्षामित्र भी अलग से तैनात हैं।
शहरी क्षेत्र में कई स्कूल ऐसे हैं, जो सिर्फ कागजों में संचालित हो रहे हैं। हालत यह है कि बजट खपाने के लिए एक कमरे में गिने-चुने बच्चे बैठते हैं। उनको अलग-अलग स्कूलों के नाम से आवंटित कर दिया जाता है। पेमेश्वर गेट स्थित प्राइमरी स्कूलों में एक भवन में पांच स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। यहां पर प्राइमरी टीला बालक, प्राइमरी टीला कन्या, पेमेश्वर गेट, प्राइमरी छपैटी, प्राइमरी हुंडा वाला मंदिर संचालित हो रहे हैं। मूल स्थानों से यह स्कूल कई सालों पूर्व हटाए जा चुके हैं। उन क्षेत्रों के बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
इसी तरह हाजीपुरा स्थित एक परिसर में चार प्राइमरी स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। यहां पर प्राइमरी गालिब नगर, प्राइमरी गालिब नगर कन्या संचालित हैं। गांधी नगर में एक कमरे में स्कूल में दो स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। इनमें एक स्कूल रोशन गंज था और दूसरा माता वाला बाग में संचालित था। लेबर कॉलोनी में एक ही परिसर में दो प्राइमरी स्कूल संचालित हो रहे हैं। आर्यनगर में वर्षों से संचालित प्राइमरी सुदर्शन अब प्राइमरी कंबुआन में पहुंच गया है। चंद्रप्रभु मंदिर के पास एक कमरे में दो प्राइमरी स्कूलों का संचालन हो रहा है। बारात घर में प्राइमरी रसूलपुर और प्राइमरी संजय हुंडा वाला का संचालन किया जा रहा है।
अधिकांश स्कूल नगर क्षेत्र में किराये की बिल्डिंग में संचालित हो रहे हैं। नए भवन बनाने का प्रस्ताव भी शासन को नहीं भेजा गया है। जो भवन खंडहर हो गए थे। उनमें हादसे की आशंका व्यक्त करते हुए दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया है। नगर क्षेत्र की व्यवस्था सुधार के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है।
डा. अरविंद पाठक- बीएसए